Holashtak 2026 Kab Hai? फरवरी में इस दिन से लगेगा होलाष्टक
punjabkesari.in Thursday, Jan 29, 2026 - 09:08 AM (IST)
Holashtak 2026 Date: होली से ठीक आठ दिन पहले होलाष्टक की शुरुआत होती है, जिसे हिंदू धर्म में अशुभ काल माना गया है। इस दौरान किसी भी प्रकार के मांगलिक और शुभ कार्य करना वर्जित होता है। वर्ष 2026 में होलाष्टक 24 फरवरी से शुरू होकर 3 मार्च 2026 तक रहेगा। आइए जानते हैं होलाष्टक का महत्व, इसकी तिथियां और इस दौरान क्या करना चाहिए और क्या नहीं।

होलाष्टक 2026 की तारीख (Holashtak 2026 Date)
पंचांग के अनुसार, होलाष्टक की शुरुआत फाल्गुन माह की अष्टमी तिथि से होती है और इसका समापन पूर्णिमा तिथि को होता है।
होलाष्टक आरंभ: 24 फरवरी 2026 (मंगलवार)
होलाष्टक समाप्त: 3 मार्च 2026 (मंगलवार)
होलिका दहन: 3 मार्च 2026
रंगों वाली होली: 4 मार्च 2026

होलाष्टक क्यों माना जाता है अशुभ?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, होलाष्टक का संबंध राक्षसी शक्तियों से जुड़ा हुआ माना जाता है। इन आठ दिनों में नकारात्मक शक्तियों का प्रभाव बढ़ जाता है, जिसे असत्य और अंधकार का प्रतीक माना जाता है। यही कारण है कि इस अवधि में शुभ और मांगलिक कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है।
मान्यता है कि होलाष्टक के दौरान किए गए शुभ कार्यों में बाधाएं आती हैं और अपेक्षित फल नहीं मिल पाता।

होलाष्टक में क्या न करें? (Holashtak Don’ts)
होलाष्टक के दौरान निम्न कार्य करना वर्जित माना गया है—
विवाह, सगाई और रोका समारोह।
गृह प्रवेश और नए मकान में प्रवेश।
नया व्यापार या नौकरी की शुरुआत।
वाहन, घर, जमीन या प्लॉट की खरीदारी।
सोना-चांदी और कीमती वस्तुओं की खरीद।
मुंडन, नामकरण, उपनयन और गोद भराई जैसे संस्कार।
बहू-बेटी की विदाई।
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दौरान शुरू किए गए कार्यों में असफलता और आर्थिक नुकसान की संभावना बनी रहती है।
होलाष्टक में क्या करें? (Holashtak Do’s)
होलाष्टक के अशुभ प्रभाव से बचने के लिए इस दौरान पूजा-पाठ और दान का विशेष महत्व बताया गया है—
भगवान विष्णु के मंत्रों का जाप करें।
नियमित रूप से स्नान और ध्यान करें।
गरीब और जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करें।
फाल्गुन पूर्णिमा के दिन चंद्र देव और मां लक्ष्मी की पूजा करें।
घर में शांति और सकारात्मक ऊर्जा बनाए रखने का प्रयास करें।
धार्मिक मान्यता है कि इन उपायों से नकारात्मक शक्तियां दूर रहती हैं और भगवान नारायण की कृपा प्राप्त होती है।
होलाष्टक भले ही अशुभ काल माना जाता हो, लेकिन इस दौरान संयम, पूजा और दान करने से इसके नकारात्मक प्रभाव को कम किया जा सकता है। यदि आप किसी शुभ कार्य की योजना बना रहे हैं, तो होलाष्टक समाप्त होने के बाद ही उसे करना उत्तम माना जाता है।

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