Jaya Ekadashi 2026: जया एकादशी पर बन रहा है दुर्लभ योगों का महासंयोग, इस विधि से पूजा करने पर कट सकते हैं जन्म-जन्मांतर के पाप
punjabkesari.in Monday, Jan 26, 2026 - 12:02 PM (IST)
Jaya Ekadashi 2026: हिंदू धर्म में एकादशी व्रत को मोक्ष प्राप्ति का विशेष साधन माना गया है। विशेष रूप से माघ मास के शुक्ल पक्ष की जया एकादशी को पापों से मुक्ति और आत्मिक शुद्धि का श्रेष्ठ व्रत कहा गया है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन श्रद्धा और विधि-विधान से भगवान विष्णु की पूजा करने पर व्यक्ति को जन्म-जन्मांतर के संचित पापों से मुक्ति मिलती है।

साल 2026 की जया एकादशी इसलिए भी खास मानी जा रही है, क्योंकि इस दिन एक साथ कई दुर्लभ और शुभ योगों का निर्माण हो रहा है, जिससे इस व्रत का फल कई गुना बढ़ जाएगा।
Jaya Ekadashi 2026 पर बन रहे हैं ये विशेष योग
ज्योतिषीय गणनाओं के अनुसार, जया एकादशी 2026 के दिन चार अत्यंत शुभ योगों का संयोग बन रहा है इंद्र योग, रवि योग,
भद्रावास योग और शिववास योग। इन योगों में किया गया व्रत, पूजा और दान अत्यंत फलदायी माना जाता है। रवि योग को पाप, दोष और बाधाओं के नाशक योग के रूप में जाना जाता है। शिववास योग सुख, समृद्धि और मानसिक शांति प्रदान करता है।
ऐसे में इस दिन भगवान विष्णु की उपासना करने से जीवन के कष्टों में कमी आती है।

Jaya Ekadashi 2026: व्रत की तिथि और समय
पंचांग के अनुसार—
एकादशी तिथि प्रारंभ:
28 जनवरी 2026, शाम 4:34 बजे
एकादशी तिथि समाप्त:
29 जनवरी 2026, रात 1:56 बजे
व्रत रखने की तिथि (उदया तिथि):
29 जनवरी 2026, गुरुवार
उदया तिथि के अनुसार ही जया एकादशी का व्रत रखा जाएगा।
जया एकादशी की पूजा विधि
यदि आप जीवन के दुख, नकारात्मक ऊर्जा और अनजाने में किए गए पापों से मुक्ति चाहते हैं, तो जया एकादशी पर इस विधि से पूजा करें—
पूजा की तैयारी
ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें। पीले रंग के वस्त्र धारण करें। हाथ में जल लेकर भगवान विष्णु के सामने व्रत का संकल्प लें।
वेदी स्थापना
चौकी पर पीला वस्त्र बिछाएं। भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा स्थापित करें।
पूजन विधि
पीले पुष्प, फल, अक्षत, धूप और दीप अर्पित करें। पंचामृत से भगवान विष्णु का अभिषेक करें। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें।
मंत्र जाप
“ॐ नमो भगवते वासुदेवाय” मंत्र का जाप करें। जया एकादशी की व्रत कथा का पाठ या श्रवण करें।
जया एकादशी का धार्मिक महत्व
पद्म पुराण के अनुसार, जया एकादशी का व्रत करने से व्यक्ति को नीच योनि में जन्म नहीं लेना पड़ता। पौराणिक कथा में उल्लेख है कि इस व्रत के प्रभाव से ही माल्यवान गंधर्व को पिशाच योनि से मुक्ति मिली थी। यह व्रत नकारात्मक कर्मों का नाश करता है। मानसिक शांति और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करता है। मोक्ष की दिशा में आगे बढ़ने का मार्ग प्रशस्त करता है।
जया एकादशी 2026 अत्यंत शुभ और दुर्लभ योगों से युक्त है। यदि इस दिन श्रद्धा, नियम और सही विधि से भगवान विष्णु की पूजा की जाए, तो जीवन के कष्टों से मुक्ति और आध्यात्मिक उन्नति संभव है। यह व्रत केवल उपवास नहीं, बल्कि आत्मशुद्धि और मोक्ष की साधना है।

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