Basant Panchami 2026 Shubh Yog: बसंत पंचमी के दिन दुर्लभ योगों का संयोग, इस समय पूजा करना रहेगा फलदायी
punjabkesari.in Wednesday, Jan 21, 2026 - 10:51 AM (IST)
Basant Panchami 2026: माघ माह की पंचमी तिथि को मनाया जाने वाला बसंत पंचमी का पर्व विद्या, बुद्धि और कला की देवी मां सरस्वती को समर्पित होता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन मां सरस्वती का प्राकट्य हुआ था, इसलिए इसे सरस्वती जयंती और सरस्वती पूजा के रूप में भी मनाया जाता है। वर्ष 2026 में बसंत पंचमी का पर्व 23 जनवरी को मनाया जाएगा। इस दिन कई दुर्लभ और शुभ योगों का महासंयोग बन रहा है, जिससे पूजा-पाठ का महत्व कई गुना बढ़ जाता है।

बसंत पंचमी का धार्मिक महत्व (Basant Panchami Significance)
बसंत पंचमी को श्री पंचमी, सरस्वती पूजा और विद्यारंभ का विशेष दिन माना जाता है। इस दिन पीले वस्त्र धारण करने और पीले रंग के भोग अर्पित करने की परंपरा है। मान्यता है कि इस दिन विधि-विधान से मां सरस्वती की आराधना करने से बुद्धि, स्मरण शक्ति, वाणी और ज्ञान में वृद्धि होती है। विद्यार्थियों, शिक्षकों, कलाकारों और लेखकों के लिए यह दिन विशेष फलदायी माना जाता है।

बसंत पंचमी 2026 पर बन रहे शुभ योग (Basant Panchami 2026 Yog)
इस वर्ष बसंत पंचमी के दिन कई अत्यंत शुभ ग्रह योग बन रहे हैं:
गजकेसरी योग
बसंत पंचमी के दिन चंद्रमा मीन राशि में प्रवेश करेंगे। चंद्रमा से चतुर्थ भाव में गुरु स्थित होने से गजकेसरी योग बन रहा है।
यह योग बुद्धि, ज्ञान, यश और सफलता प्रदान करने वाला माना जाता है। इस योग में सरस्वती पूजा करने से विद्यार्थियों को विशेष लाभ मिलता है।
बुधादित्य योग
सूर्य और बुध की युति से बनने वाला बुधादित्य योग भी इस दिन सक्रिय रहेगा। यह योग शिक्षा, करियर, व्यापार और संवाद क्षमता में वृद्धि करता है
सर्वार्थ सिद्धि योग
बसंत पंचमी के दिन सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। इस योग में किए गए नए कार्यों में सफलता मिलने की मान्यता है।

बसंत पंचमी 2026 शुभ मुहूर्त (Basant Panchami 2026 Shubh Muhurat)
पंचांग के अनुसार:
पंचमी तिथि प्रारंभ: 23 जनवरी 2026, रात 02:28 बजे
पंचमी तिथि समाप्त: 24 जनवरी 2026, रात 01:46 बजे
सरस्वती पूजा का शुभ मुहूर्त:
सुबह 7:15 बजे से दोपहर 12:50 बजे तक
इस समय पूजा करना अत्यंत शुभ और फलदायी माना गया है।
सरस्वती पूजा में अर्पित करें ये भोग (Saraswati Puja Bhog)
बूंदी या बूंदी के लड्डू, खीर, केसर भात, मीठे चावल, पीली मिठाई और फल जैसे बेर, केला, संतरा, अनार व सेब।
बसंत पंचमी पर करें सरस्वती वंदना का पाठ (Saraswati Vandana)
या कुन्देन्दुतुषारहारधवला या शुभ्रवस्त्रावृता।
या वीणावरदण्डमण्डितकरा या श्वेतपद्मासना॥
या ब्रह्माच्युत शंकरप्रभृतिभिर्देवैः सदा वन्दिता।
सा मां पातु सरस्वती भगवती निःशेषजाड्यापहा॥१॥
शुक्लां ब्रह्मविचार सार परमामाद्यां जगद्व्यापिनीं।
वीणा-पुस्तक-धारिणीमभयदां जाड्यान्धकारापहाम्॥
हस्ते स्फटिकमालिकां विदधतीं पद्मासने संस्थिताम्।
वन्दे तां परमेश्वरीं भगवतीं बुद्धिप्रदां शारदाम्॥२॥
बसंत पंचमी 2026 का दिन शुभ योगों के कारण अत्यंत विशेष है। इस दिन शुभ मुहूर्त में मां सरस्वती की पूजा करने से ज्ञान, बुद्धि, करियर और जीवन में सकारात्मक परिवर्तन के योग बनते हैं।
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Content Writer
Niyati Bhandari