18 साल बाद नर्मदा नदी में डूब जाता है ये शिव मंदिर, पानी में लहराता मंदिर का झंडा

2020-11-27T18:31:17.043

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हमारे देश में बहुत से ऐसे मंदिर हैं जिनसे जुड़े रहस्य अपने आप में बहुत ही खास व अद्भुत होते हैं बल्कि इन्हीं रहस्यों के चलते ये मंदिर न केवल देशभर में बल्कि पूरे विश्वभर में प्रसिद्ध हासिल कर लेते हैं। आज हम आपको  एक ऐसे ही मंदिर के बारे में बताने वाले हैं जिसके बारे में मान्यता ये प्रचलित है कि प्रत्येक 18 साल बाद हरिहरेश्वर नामक ये मंदिर पानी में डूब जाता है। जी हां, आपरको जानकर शायग थोड़ी हैरानी होगी मगर आपको बता दें इस मंदिर से जुड़ी तमाम लोक मान्यताएं कुछ इसी तरह की हैं। तो आइए आपको विस्तारपूर्वक इस मंदिर के बारे में बताते हैं कि आखिर कहां हरि हरिहेरश्वर नामक यह जगह कहां हैं और ये अद्भुत मंदिर किस देवता तो समर्पित है। 
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हरिहरेश्वर महाराष्ट्र के रायगढ़ जिले में स्थित एक छोटा-सा खूबसूरत शहर है। चार पहाडिय़ों ब्रह्माद्री, पुष्पाद्री, हर्षिनाचल और हरिहर से घिरा हुआ हरिहरेश्वर कोंकण क्षेत्र में है और एक ओर से हरे भरे जंगलों तथा दूसरी ओर से प्राचीन समुद्र तटों से घिरा हुआ है। यह स्थान हरिहरेश्वर मंदिर के लिए प्रसिद्ध है, जो भगवान शिव को समर्पित है, यही कारण है कि इसे देवघर अर्थात हरि (भगवान) का घर भी कहा जाता है, यहां सावित्री  नदी अरब सागर में मिलती है। हरिहरेश्वर अपने खूबसूरत समुद्र तटों के लिए प्रसिद्ध है, जो वीकेंड के लिए आदर्श स्थान है। पास स्थित पुष्पाद्रि पहाड़ी संपूर्ण स्थान की सुंदरता को और बढ़ाती है। एक प्रमुख धार्मिक स्थान होने के कारण इसे दक्षिण काशी भी कहा जाता है। यह विभिन्न देवों, भगवान शिव, भगवान विष्णु और भगवान ब्रह्मा के मंदिरों का घर है। कालभैरव मंदिर और योगेश्वरी मंदिर अन्य दो धार्मिक स्थान हैं। हरिहरेश्वर का उद्भव मराठों के शासन काल में महान शासक छत्रपति शिवाजी महाराज के समय हुआ था। प्रथम पेशवा शासक बाजीराव सन् 1723 में यहां आए थे। यहां के अनेक मंदिरों और स्मारकों की प्राचीन वास्तुकला उस समय अपनाई गई भारतीय वास्तुकला शैली के प्रमाण हैं। प्रत्येक मंदिर की मूर्ति से एक कहानी जुड़ी हुई है। कई हिन्दू प्राचीन कथाएं हैं जो आपको मंत्रमुग्ध कर देंगी।

हरिहरेश्वर बीच : हरिहरेश्वर समुद्र तट हरिहरेश्वर शहर का एक प्रमुख आकर्षण है। समुद्र तट बहुत सुंदर है और कुछ समय रुकने के लिए उपयुक्त है। यहां की रेत नरम, सफेद और साफ है और हर समय यहां आरामदायक हवा बहती रहती है। ऐसा कहा जाता है 18 साल के बाद ये मंदिर पूरी तरह से पानी में डूब जाता है। 

गणेश गली : गणेश गली एक छोटी पुलिया है। दो पर्वतों के बीच स्थित एक संकरी नहर। हरिहरेश्वर शहर में स्थित इस नहर के अंत में भगवान गणपति की मूर्ति है। जिस स्थान पर यह मूर्ति मिली थी उसे एक पवित्र और आध्यात्मिक जगह माना जाता है, जो लगभग 30 फुट पानी के अंदर स्थित है। ऐसा माना जाता है कि ज्वार के दौरान इस जगह पर मूर्ति को स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है। प्रकृति की सुंदर पृष्ठभूमि में तनाव मुक्ति होने के लिए यह स्थान सर्वश्रेष्ठ है।
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यह शहर अरब सागर की गोद में बसा हुआ है। हरिहर पहाड़ी यहां का आकर्षण अधिक बढ़ाती है। पानी से प्रेम करने वाले यहां स्पीड बोट का आनंद उठा सकते हैं या वाटर स्कूटर की सवारी कर सकते हैं। हरिहरेश्वर बीच प्रदूषण रहित है और आपको अपने परिवार के साथ सूर्यास्त देखने के लिए आमंत्रित करता है।
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काल भैरव मंदिर : काल भैरव मंदिर हरिहरेश्वर का एक प्रसिद्ध और पुराना मंदिर है। भक्त यहां वर्ष भर आते रहते हैं। यह मंदिर भगवान शिव को समर्पित है। यहां पाई जाने वाली मूर्तियों में कालभैरव भी एक हैं, जिन्हें सभी मंत्र शास्त्र का भगवान कहा जाता है। किंवदंती है कि भगवान शिव ने कालभैरव को बनाया और उसे सभी मंत्रों का वरदान दिया। मंदिर की वास्तुकला सुंदर है। पास ही योगेश्वरी मंदिर भी है जिसे ‘दक्षिण काशी’ के नाम से भी जाना जाता है। महाशिवरात्रि के अवसर पर भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए यहां भक्तों की लम्बी कतारें लगती हैं। हरिहरेश्वर समुद्र तट के पास स्थित होने के कारण इस मंदिर की पृष्ठभूमि बेहद सुंदर है।


 


Jyoti

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