Hanuman Jayanti 2020: दो बार क्यों मनाया जाता है पवनपुत्र का जन्मोत्सव, क्यों पड़ा हनुमान नाम

2020-11-13T13:53:37.097

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
आज यानि 13 नवंबर कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि को एक साथ कई पर्व मनाए जा रहे हैं। इस सूची में धनतेरस, यम पञ्चक प्रारम्भ, यम दीपम, प्रदोष व्रत, मासिक शिवरात्रि, काली चौदस, हनुमान पूजा आदि शामिल है। ज्योतिष शास्त्र के हनुमान जंयती का पर्व साल में दो बार पड़ता है, दोनों ही दिन पवनपुत्र हनुमान की पूजा के साथ रामायण, रामचरित मानस का अखंड पाठ, सुंदरकांड का पाठ एवं हनुमान बाहुक आदि का पाठ किया जाता है। अगर बात करें कि साल में दो बार पड़ने के पीछे के कारण की तो कहा जाता है इसका कारण है कर्क राशि से दक्षिण वासी इनका जन्मदिन चैत्र पूर्णिमा को मनाया जाता है, जबकि कर्क राशि से उत्तरवासी हनुमान जी के जन्मोत्सव कार्तिक कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को मनाया जाता है। 
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इस प्रकार है वो श्लोक- 
वायुपुराण में एक श्लोक वर्णित है- 
आश्विनस्या सितेपक्षे स्वात्यां भौमे च मारुतिः। 
मेष लग्ने जनागर्भात स्वयं जातो हरः शिवः।। 

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अर्थात- भगवान हनुमान का जन्म कृष्ण पक्ष चतुर्दशी मंगलवार को स्वाति नक्षत्र की मेष लग्न और तुला राशि में हुआ था। अपने बाल्य काल में हनुमान तरह-तरह की लीलाएं करते थे। एक दिन अधिकतर भूख लगने पर उन्होंने सूर्य को मधुर समझकर अपने मुंह में भर लिया। जिसके कारण पूरे संसार में अंधेरा छा गया। तो वहीं इंद्र देव ने इसे विपत्ति समझकर हनुमान जी पर व्रज से प्रहार किया। जिस कारण उनकी ठोड़ी टेढ़ी हो गई। कहा जाता है इसी कारण उन्हें हनुमान नाम से जाना जाता है। बता दें हनुमान जी के जन्‍मोत्‍सव को देश भर में हनुमान जयंती के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्‍यता है कि श्री हनुमान ने शिव जी के 11वें अवतार के रूप में माता अंजना की कोख से जन्‍म लिया था।


Jyoti

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