Govardhan Parikrama : राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की गोवर्धन यात्रा आज, जानें क्या है इसके पीछे छिपा धार्मिक और आध्यात्मिक रहस्य ?
punjabkesari.in Saturday, Mar 21, 2026 - 08:53 AM (IST)
शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
Govardhan Parikrama : 21 मार्च की सुबह से ही वृंदावन और गोवर्धन क्षेत्र में असाधारण हलचल देखने को मिल रही है। इसकी वजह है देश की राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का आज गोवर्धन गिरिराज की 21 किलोमीटर लंबी परिक्रमा करना। इस खास अवसर को ऐतिहासिक माना जा रहा है, क्योंकि ऐसा पहली बार हो रहा है जब देश का कोई राष्ट्रपति इस धार्मिक परंपरा में भाग ले रहा है।
निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, राष्ट्रपति का काफिला वृंदावन से गोवर्धन पहुंचेगा। वहां वह दानघाटी मंदिर में गिरिराज महाराज का दुग्धाभिषेक और विधिवत पूजा-अर्चना करेंगी। इसके बाद वह गोल्फ कार्ट की सहायता से पूरी परिक्रमा पूरी करेंगी। कार्यक्रम समाप्त होने के बाद वह पेठा हेलीपोर्ट से दिल्ली के लिए रवाना होंगी।
इस दौरे को देखते हुए पूरे इलाके में सुरक्षा के कड़े इंतजाम किए गए हैं। प्रशासन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह सतर्क हैं, साथ ही ट्रैफिक व्यवस्था में भी बदलाव किया गया है ताकि आम लोगों को किसी प्रकार की असुविधा न हो।
वृंदावन और मथुरा में भी रहेगा व्यस्त कार्यक्रम
राष्ट्रपति का दौरा केवल गोवर्धन तक सीमित नहीं है। वह बांके बिहारी मंदिर में दर्शन करेंगी, जहां उनका विशेष स्वागत किया जाएगा। इसके अलावा श्री कृष्ण जन्मभूमि जाने की भी संभावना जताई जा रही है। सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए पूरे क्षेत्र को नो-फ्लाइंग जोन घोषित किया गया है।
गोवर्धन परिक्रमा का धार्मिक महत्व
गोवर्धन परिक्रमा हिंदू धर्म की एक अत्यंत पवित्र परंपरा मानी जाती है, जिसका संबंध भगवान श्री कृष्ण से जुड़ा है। मान्यता है कि उन्होंने इंद्र के प्रकोप से ब्रजवासियों की रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत को अपनी छोटी उंगली पर उठाया था। तभी से इस पर्वत को भगवान का स्वरूप मानकर उसकी परिक्रमा करने की परंपरा चली आ रही है। भक्तों का विश्वास है कि श्रद्धा से की गई यह परिक्रमा जीवन के कष्ट दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान करती है।
परिक्रमा की प्रक्रिया
यह परिक्रमा लगभग 21 किलोमीटर लंबी होती है और इसकी शुरुआत आमतौर पर दानघाटी मंदिर से होती है। श्रद्धालु नंगे पैर चलते हुए इस मार्ग को पूरा करते हैं और रास्ते में राधा कुंड, श्याम कुंड, मानसी गंगा और कुसुम सरोवर जैसे पवित्र स्थलों पर रुककर पूजा करते हैं। कुछ लोग इसे एक ही दिन में पूरा कर लेते हैं, जबकि कुछ श्रद्धालु धीरे-धीरे इसे संपन्न करते हैं। दंडवत परिक्रमा भी की जाती है, जो काफी कठिन मानी जाती है।
मान्यताएं और जरूरी सावधानियां
मान्यता है कि नियम और श्रद्धा के साथ की गई परिक्रमा जीवन में सकारात्मक बदलाव लाती है। इस दौरान साफ-सफाई, संयम और अनुशासन का विशेष ध्यान रखना जरूरी होता है। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं के चलते प्रशासन भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम करता है। राष्ट्रपति के दौरे के कारण इस बार सुरक्षा व्यवस्था और भी सख्त कर दी गई है।
राष्ट्रपति की पहल का संदेश
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की यह परिक्रमा केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह देश को एक संदेश भी देती है कि आधुनिक युग में भी हमारी परंपराएं और सांस्कृतिक धरोहर उतनी ही महत्वपूर्ण हैं। देश के सर्वोच्च पद पर आसीन व्यक्ति का इस तरह धार्मिक परंपरा से जुड़ना समाज के लिए प्रेरणादायक माना जा रहा है और इससे लोगों में अपनी संस्कृति के प्रति जुड़ाव और भी मजबूत होता है।
