धरती की सबसे पुरानी पर्वतमालाएं कौन-सी हैं, जानें भारत की सबसे प्राचीन पहाड़ियों का इतिहास
punjabkesari.in Saturday, May 09, 2026 - 03:30 PM (IST)
Earth oldest mountain range : महाद्वीपों के आज का आकार लेने से बहुत पहले धरती की ऊपरी परत बहुत अशांत थी। इस हलचल से ही पुराने महाद्वीप और शुरुआती पहाड़ियां बनीं। धरती के सबसे प्राचीन भूवैज्ञानिक इतिहास के तौर पर 2 जगहें, दक्षिण अफ्रीका में ‘बार्बरटन ग्रीनस्टोन बैल्ट’ और भारत में अरावली पर्वतमाला बहुत ही मशहूर है। ‘बार्बरटन ग्रीनस्टोन बैल्ट’ की बात करें तो यह दक्षिण अफ्रीका के पुलंगा प्रांत में है। इसकी उम्र लगभग 3.2 से 3.6 अरब साल मानी जाती है। इस ‘मखोनज्वा पर्वत’ भी कहते हैं।
दुनिया की सबसे पुरानी चट्टानें
इन पहाड़ों से दुनिया की कुछ सबसे पुरानी चट्टानें बाहर निकली हैं। ये चट्टानें दिखाती हैं कि जब धरती शुरुआत में ठंडी हो रही थी तब उसकी ऊपरी परत कैसे बनी थी। यह पर्वत शृंखला कापवाल क्रेटन का हिस्सा है, जो धरती के सबसे पुराने महाद्वीपीय कोर में से एक है। इसे ‘यूनेस्को वल्र्ड हैरिटेज साइट’ में शामिल किया गया है। भूविज्ञानी इस बार्बरटन इलाके को प्रारंभिक पृथ्वी की खिड़की कहते हैं, क्योंकि यहां से शुरुआती धरती की जानकारी मिलती है। इन चट्टानों की परत में छोटे जीवाश्म और रासायनिक अवशेष मिलते हैं। ये अवशेष दिखाते हैं कि इस धरती पर जीवन के कुछ सबसे शुरुआती रूप कैसे थे। इन खोजों से वैज्ञानिकों को समझने में मदद मिली कि धरती के शुरुआती वायुमंडल और महासागर कैसे बने और अरबों साल पहले जीवन की शुरुआत कैसे हुई।
इन पहाड़ों की टाइमलाइन
बार्बरटन पृथ्वी पर सबसे पुराने पढ़े जा सकने वाले लैंडस्केपों में से एक है। यह टाइमलाइन समझने का सबसे आसान तरीका है कि बार्बरटन कितना पुराना है-
4.5 अरब साल पहले : पृथ्वी बनी।
3.8 अरब साल पहले : पहली स्टेबल क्रस्ट दिखी।
3.6 अरब साल पहले : बार्बरटन फॉर्मेशन शुरू हुए।
3.5 अरब साल पहले : माइक्रोबियल जीवन दिखा।
3.2 अरब साल पहले : बार्बरटन में ज्वालामुखी की एक्टिविटी कम हुई।
5 करोड़ साल पहले : हिमालय बनना शुरू हुआ।
शुरुआती पृथ्वी के बारे में ये सब लगता है पता : यह इलाका उन प्रोसैस का जियोलॉजिकल आर्काइव है, जिन्होंने आज के महाद्वीपों के बनने से बहुत पहले ग्रह को आकार दिया था। चट्टानें दिखाती हैं कि सबसे शुरुआती कॉन्टिनैंटल क्रस्ट ऐसे हालात में कैसे बना, जो आज नहीं देखे जाते। बार्बरटन दिखाते हैं कि आज के प्लेट टैक्टोनिक्स से पहले क्रस्ट कैसे बढ़ा। सतह के नीचे क्या टै परेचर था। शुरुआती कॉन्टिनैंटल टुकड़ों का बढ़ना। पुराने महासागर और वायुमंडल।
चट्टानों में मौजूद कैमिकल निशान इन बातों का सबूत देते हैं : शुरुआती समुद्री पानी की कैमिस्ट्री, ऑक्सीजन के ज्यादा होने से पहले एटमॉस्फियर की बनावट, शुरुआती जीवन के जिंदा रहने के लिए जरूरी वायुमंडल स्थिति, उल्कापिंड का असर और ज्वालामुखी की एक्टिविटी, बहुत ज्यादा गर्म लावा के बचे हुए हिस्से, उल्कापिंड के असर वाले तूफानों से बनी परतें, वे हिंसक घटनाएं, जिन्होंने नए ग्रह को आकार दिया, शुरुआती जीवन के सबूत।
इलाके में मिलती हैं ये चीजें : शुरुआती सिंगल-सैल वाले जीवों के माइक्रोस्कोपिक निशान, अब तक मिले कुछ सबसे पुराने बायोलॉजिकल सिग्नेचर, शुरुआती माइक्रोबियल एन्वायरनमैंट के फिजिकल सबूत।
भारत की सबसे पुरानी पर्वतमाला - ‘अरावली’
राजस्थान, हरियाणा और दिल्ली में फैली हुई अरावली पर्वतमाला लगभग 3.2 अरब साल पुरानी है। यह आज भी दुनिया की उन सबसे पुरानी मुड़ी हुई पर्वत शृंखलाओं में से एक है, जो मौजूद हैं। ये पहाडिय़ां कभी हिमालय से ऊंची थीं लेकिन समय के साथ घिसकर छोटी हो गई हैं। अब ये लुढ़कती पहाडिय़ों और पथरीली चोटियों की एक शृंखला बन गई है, जो उत्तरी भारत के बड़े हिस्से की पहचान हैं। भूवैज्ञानिक रूप से अरावली पर्वतमाला भारतीय शील्ड की हिस्सा है।
अरावली का महत्व : यह पर्वतमाला तांबा, जस्ता और सीसा जैसे खनिजों से भरी हुई है। इस वजह से इसने लंबे समय से इस क्षेत्र से बसावट, व्यापार और यहां तक कि मानसून की चाल को भी प्रभावित किया है। पर्यावरण की नजर से इन पहाड़ियों के आस-पास के जंगल दिल्ली और गुरुग्राम जैसे बड़े शहरों के लिए हरे फेफड़े की तरह काम करते हैं, जो हवा को साफ रखने में मदद करते हैं। ये पहाड़ियां हमें याद दिलाती हैं कि हमारे पैरों के नीचे की जमीन ने सिर्फ साम्राज्यों के बनने और मिटने को ही नहीं देखा है, बल्कि खुद इस ग्रह के जन्म को भी देखा है।
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