Ganga Saptami 2026: 22 या 23 अप्रैल? न हों भ्रमित, नोट कर लें गंगा जयंती की सही तारीख और स्नान-दान का शुभ मुहूर्त
punjabkesari.in Saturday, Apr 11, 2026 - 09:32 AM (IST)
Ganga Saptami 2026: हिंदू धर्म में गंगा सप्तमी, जिसे गंगा जयंती के नाम से भी जाना जाता है का विशेष महत्व है। मान्यताओं के अनुसार, इसी पावन दिन मां गंगा राजा भगीरथ की कठोर तपस्या से प्रसन्न होकर पृथ्वी पर अवतरित हुई थीं। वर्ष 2026 में इसकी तिथि को लेकर श्रद्धालुओं के बीच असमंजस की स्थिति बनी हुई है कि यह पर्व 22 अप्रैल को मनाया जाए या 23 अप्रैल को।

तिथि को लेकर क्यों है भ्रम?
वर्ष 2026 में वैशाख माह के कृष्ण पक्ष की सप्तमी तिथि का समय कुछ इस प्रकार है:
सप्तमी तिथि का आरंभ: 22 अप्रैल 2026, रात 10 बजकर 50 मिनट पर।
सप्तमी तिथि का समापन: 23 अप्रैल 2026, रात 8 बजकर 50 मिनट पर।
शास्त्रों के अनुसार, त्योहारों का निर्णय 'उदया तिथि' (सूर्योदय के समय की तिथि) के आधार पर किया जाता है। चूंकि 23 अप्रैल को सूर्योदय के समय सप्तमी तिथि विद्यमान रहेगी, इसलिए गंगा सप्तमी का पर्व 23 अप्रैल 2026 को ही मनाया जाएगा।

गंगा सप्तमी का पौराणिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, पृथ्वी पर उतरते समय गंगा मां के प्रचंड वेग को नियंत्रित करने के लिए भगवान शिव ने उन्हें अपनी जटाओं में धारण किया था। मान्यता है कि इस दिन पवित्र गंगा नदी में स्नान करने से न केवल जन्म-जन्मांतर के पापों का नाश होता है, बल्कि पितरों की आत्मा को भी परम शांति प्राप्त होती है।

घर पर कैसे करें गंगा सप्तमी पूजा? (सरल विधि)
यदि आप गंगा तट पर नहीं जा सकते, तो घर पर ही इन नियमों का पालन करें:
पवित्र स्नान: नहाने के पानी में थोड़ा सा गंगाजल मिलाकर स्नान करें।
सूर्य अर्घ्य: तांबे के पात्र में जल और गंगाजल मिलाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।
पूजन सामग्री: मां गंगा को पुष्प, अक्षत, धूप, दीप और नैवेद्य अर्पित करें।
मंत्र जाप: पूजा के दौरान 'ॐ नमो गंगायै विश्वरूपिणी नारायणी नमो नमः' मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप करें।
दीपदान व दान: शाम के समय घर या मंदिर में दीपदान करें और जरूरतमंदों को फल या अनाज का दान करें।

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
