Ganesh chauth ki Katha: आपने भी रखा है तिल चौथ व्रत, संतान की लंबी आयु के लिए अवश्य पढ़ें श्री गणेश कथा

punjabkesari.in Tuesday, Jan 06, 2026 - 04:20 PM (IST)

Til chauth vrat Katha: माघ महीने की कृष्ण पक्ष चतुर्थी को संकष्टी गणेश चतुर्थी, सकट चौथ, माघी चतुर्थी, तिल चौथ या वक्रतुंडी चतुर्थी भी कहा जाता है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, चतुर्थी तिथि के स्वामी भगवान गणेश हैं। इस दिन विशेष रूप से भगवान श्रीगणेश व चंद्रमा की पूजा की जाती है। 

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भगवान गणेश को तिल के लड्डुओं का भोग लगाया जाता है। गणेश जी को भगवान शिव से वरदान प्राप्त है कि जो व्यक्ति संकष्टी चतुर्थी के दिन व्रत रखकर शाम में चंद्रोदय के बाद शिव जी सहित गणेश जी की पूजा करेगा उसके सारे संकट दूर हो जाएंगे।
देश के कई हिस्सों में सकट चौथ का व्रत महिलाएं विशेष रूप से रखती हैं। यह संतान की लंबी आयु, सुख-समृद्धि और सभी संकटों (बाधाओं) को दूर करने के लिए भगवान गणेश और सकट माता को समर्पित है, जिसमें महिलाएं बच्चों की खुशहाली के लिए व्रत रखती हैं, तिल-कुटा का भोग लगाती हैं और चंद्रोदय के बाद चंद्रमा को अर्घ्य देकर व्रत खोलती हैं। 

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यह भी मान्यता है कि संकष्टी चतुर्थी के व्रत से शारीरिक कष्ट एवं मानसिक परेशानियों में कमी आती है। यह व्रत आर्थिक समस्याओं को भी दूर करने वाला कहा गया है। 

पुराणों के अनुसार, इसी दिन गणेश जी का जन्म हुआ था। इस दिन तिलकुट चतुर्थी भी है। माघ कृष्ण चतुर्थी 6 जनवरी को सुबह 8.01 बजे से 7 जनवरी सुबह 6. 52 बजे तक रहेगी। 

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पौराणिक कथा के अनुसार, एक बार देवतागण किसी कारणवश भगवान शिव के पास पहुंचे, तब महादेव के साथ कार्तिकेय और गणेश जी भी बैठे थे। किसी बात पर तब भगवान शिव ने कहा कि जो पहले पृथ्वी की परिक्रमा पूरी करेगा, वह श्रेष्ठ कहलाएगा। कार्तिकेय अपने वाहन मोर पर बैठ कर पृथ्वी की परिक्रमा के लिए निकल गए। गणेश जी सोचने लगे कि चूहे पर सवार होकर पृथ्वी की परिक्रमा करने में बहुत समय लग जाएगा। गणेश जी अपने स्थान से उठे और माता-पिता की तीन बार परिक्रमा करके बैठ गए। 

शिवजी ने गणेश जी से पृथ्वी की परिक्रमा न करने का कारण पूछा। तब गणेश जी ने कहा, ‘‘माता-पिता के चरणों में ही समस्त लोक हैं।’’ 

यह सुनकर शिव जी ने गणेश जी को आशीर्वाद दिया कि चतुर्थी के दिन जो तुम्हारा पूजन करेगा और रात्रि में चंद्रमा को अर्घ्य देगा, उसके तीनों ताप यानी दैहिक ताप, दैविक ताप तथा भौतिक ताप दूर होंगे। इस व्रत को करने से व्रतधारी के सभी तरह के दुख दूर होंगे और सुख-समृद्धि बढ़ेगी।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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