Falgun Amavasya 2026: इस फाल्गुन अमावस्या जरूर करें ये 5 काम, पूर्वजों का मिलेगा आशीर्वाद और दूर होगा पितृ दोष

punjabkesari.in Wednesday, Feb 11, 2026 - 11:59 AM (IST)

Falgun Amavasya 2026 Date and Upay: हिंदू धर्म में अमावस्या तिथि का विशेष धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व माना गया है। फाल्गुन मास की अमावस्या इस वर्ष 17 फरवरी 2026 को पड़ रही है। इस दिन पवित्र नदियों में स्नान, दान-पुण्य, पितरों का तर्पण और पिंडदान करने का विधान है। मान्यता है कि अमावस्या पर किए गए ये कार्य पूर्वजों को तृप्त करते हैं और उनके आशीर्वाद से परिवार में सुख-समृद्धि बनी रहती है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, अमावस्या के दिन पितृ पूजन और दान करने से पितृ दोष से मुक्ति मिलती है और जीवन में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं। आइए जानते हैं कि फाल्गुन अमावस्या के दिन कौन-कौन से कार्य करना शुभ माना गया है।

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अमावस्या पर स्नान-दान का महत्व
फाल्गुन अमावस्या के दिन गंगा, यमुना या अन्य पवित्र नदियों में स्नान करना अत्यंत फलदायी माना जाता है। यदि तीर्थ स्थान पर जाना संभव न हो तो घर पर ही स्नान के जल में गंगाजल मिलाकर स्नान किया जा सकता है। स्नान के बाद सूर्य देव को अर्घ्य दें और पितरों का स्मरण करते हुए तर्पण करें। इसके पश्चात जरूरतमंदों को अन्न, वस्त्र और धन का दान करना पुण्यकारी माना गया है।

पीपल के पेड़ की पूजा
शास्त्रों में पीपल के वृक्ष में त्रिदेव ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास बताया गया है। साथ ही पितरों का निवास भी पीपल में माना जाता है।
अमावस्या की सुबह पीपल के वृक्ष में जल अर्पित करें।

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सायंकाल सरसों के तेल या घी का दीपक जलाएं।
मान्यता है कि ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और परिवार में खुशहाली व समृद्धि आती है।

दान-पुण्य का विशेष महत्व
फाल्गुन अमावस्या के दिन दान करने से कई गुना पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
तिल, अन्न और वस्त्र का दान करें।
जरूरतमंदों को भोजन कराएं।
पितरों के नाम से दान करें।

कहा जाता है कि अमावस्या पर तिल दान और अन्न दान करने से पितृ दोष शांत होता है और पूर्वजों की कृपा बनी रहती है।

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दीपदान से मिलती है पितृ कृपा
अमावस्या की रात्रि में घर की छत या मुख्य द्वार पर दक्षिण दिशा की ओर मुख करके घी का दीपक जलाना शुभ माना जाता है।
धार्मिक मान्यता है कि दीपदान से पितरों को शांति मिलती है और परिवार में सुख-समृद्धि का वास होता है।

गौ सेवा और जीवों को भोजन
फाल्गुन अमावस्या के दिन गाय को हरा चारा या रोटी खिलाना पुण्यदायी माना गया है। इसके साथ ही कौवे और अन्य जीव-जंतुओं को अन्न देना भी पितृ तृप्ति का माध्यम माना गया है। मान्यता है कि ऐसा करने से पूर्वज प्रसन्न होकर अपने वंशजों को आशीर्वाद देते हैं।

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पितृ तर्पण और पिंडदान
अमावस्या तिथि पितरों के तर्पण और पिंडदान के लिए अत्यंत शुभ मानी जाती है। विधि-विधान से किया गया तर्पण पितरों को शांति प्रदान करता है और परिवार को उनके आशीर्वाद की प्राप्ति होती है।

यदि संभव हो तो किसी योग्य ब्राह्मण से विधिपूर्वक तर्पण कराएं।

फाल्गुन अमावस्या 17 फरवरी 2026 को मनाई जाएगी। इस दिन स्नान, दान, तर्पण, दीपदान और गौ सेवा जैसे कार्य करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है। श्रद्धा और विधि-विधान से किए गए इन उपायों से पितृ दोष से राहत मिलती है तथा परिवार में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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