Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026: द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी पर करें ये पाठ, बनेगा ऋणमुक्ति योग और मिलेगी आर्थिक संकट से राहत
punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 08:15 AM (IST)
Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026: सनातन धर्म में चतुर्थी तिथि को अत्यंत पावन और फलदायी माना गया है। हर माह कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को संकष्टी चतुर्थी व्रत रखा जाता है, जो विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य भगवान गणेश को समर्पित होता है। फाल्गुन माह में पड़ने वाली संकष्टी चतुर्थी को द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के नाम से जाना जाता है।
इस दिन श्रद्धा और नियमपूर्वक व्रत रखने तथा गणेश जी की पूजा करने से जीवन के सभी संकटों से मुक्ति मिलने की मान्यता है। विशेष रूप से इस दिन ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्र का पाठ करने से कर्ज, आर्थिक संकट और मानसिक तनाव दूर होता है।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का धार्मिक महत्व
हिंदू मान्यताओं के अनुसार, द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन सच्चे मन से की गई पूजा से भगवान गणेश अत्यंत प्रसन्न होते हैं। इस दिन व्रत रखने से जीवन के विघ्न और बाधाएं दूर होती हैं। आर्थिक स्थिति मजबूत होती है। कर्ज से मुक्ति मिलती है। घर में धन, सुख और समृद्धि का वास होता है।
शास्त्रों में उल्लेख है कि संकष्टी चतुर्थी का व्रत विशेष रूप से उन लोगों के लिए फलदायी होता है, जो आर्थिक परेशानियों, ऋण या व्यापारिक संकट से जूझ रहे हों।

द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी 2026 कब है? (Dwijapriya Sankashti Chaturthi 2026 Date & Time)
वैदिक पंचांग के अनुसार—
चतुर्थी तिथि प्रारंभ: 5 फरवरी 2026, रात 12:09 बजे
चतुर्थी तिथि समाप्त: 6 फरवरी 2026, रात 12:22 बजे
सनातन धर्म में उदयातिथि को मान्यता दी जाती है। इस आधार पर द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी का व्रत 5 फरवरी 2026, गुरुवार को रखा जाएगा। इस दिन श्रद्धालु दिन भर उपवास रखकर रात्रि में चंद्र दर्शन के बाद व्रत का पारण करते हैं।
ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्र का पाठ क्यों है विशेष?
द्विजप्रिय संकष्टी चतुर्थी के दिन पूजा के दौरान ऋणमुक्ति गणेश स्तोत्र का पाठ करना अत्यंत शुभ माना गया है। मान्यता है कि इस स्तोत्र के नियमित पाठ से पुराने कर्ज से छुटकारा मिलता है। धन लाभ के नए मार्ग खुलते हैं। व्यापार और नौकरी में बाधाएं दूर होती हैं।
मानसिक तनाव कम होता है।
शास्त्रों के अनुसार, यदि कोई व्यक्ति इस स्तोत्र का तीन संध्या (प्रातः, दोपहर और संध्या) में पाठ करता है, तो छह महीने के भीतर ऋण से मुक्ति मिलने की प्रबल संभावना होती है।

॥ ऋणमुक्ति श्री गणेश स्तोत्र ॥
ॐ स्मरामि देवदेवेशं वक्रतुण्डं महाबलम्।
षडक्षरं कृपासिन्धुं नमामि ऋणमुक्तये॥
महागणपतिं वन्दे महासेतुं महाबलम्।
एकमेवाद्वितीयं तु नमामि ऋणमुक्तये॥
एकाक्षरं त्वेकदन्तमेकं ब्रह्म सनातनम्।
महाविघ्नहरं देवं नमामि ऋणमुक्तये॥
शुक्लाम्बरं शुक्लवर्णं शुक्लगन्धानुलेपनम्।
सर्वशुक्लमयं देवं नमामि ऋणमुक्तये॥
रक्ताम्बरं रक्तवर्णं रक्तगन्धानुलेपनम्।
रक्तपुष्पैः पूज्यमानं नमामि ऋणमुक्तये॥
कृष्णाम्बरं कृष्णवर्णं कृष्णगन्धानुलेपनम्।
कृष्णयज्ञोपवीतं च नमामि ऋणमुक्तये॥
पीताम्बरं पीतवर्णं पीतगन्धानुलेपनम्।
पीतपुष्पैः पूज्यमानं नमामि ऋणमुक्तये॥
सर्वात्मकं सर्ववर्णं सर्वगन्धानुलेपनम्।
सर्वपुष्पैः पूज्यमानं नमामि ऋणमुक्तये॥
एतद् ऋणहरं स्तोत्रं त्रिसन्ध्यं यः पठेन्नरः।
षण्मासाभ्यन्तरे तस्य ऋणच्छेदो न संशयः॥
सहस्रदशकं कृत्वा ऋणमुक्तो धनी भवेत्॥
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Content Writer
Niyati Bhandari