Magh Mela 2026 : बसंत पंचमी पर संगम में आस्था का महासंगम, गजकेसरी योग में करोड़ों श्रद्धालुओं ने लगाई डुबकी
punjabkesari.in Friday, Jan 23, 2026 - 10:25 AM (IST)
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Magh Mela 2026 : संगम की रेती पर आयोजित माघ मेले में चौथे प्रमुख स्नान पर्व बसंत पंचमी के दिन आस्था का सैलाब उमड़ पड़ा। प्रयागराज में यह पर्व पूरे श्रद्धा, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जा रहा है। घने कोहरे और कड़ाके की ठंड के बावजूद लाखों श्रद्धालु गंगा, यमुना और अदृश्य सरस्वती के संगम पर गजकेसरी योग के शुभ अवसर में पुण्य स्नान कर रहे हैं।
बसंत पंचमी के अवसर पर संतों और भक्तों ने पीले वस्त्र धारण कर संगम में आस्था की डुबकी लगाई। विभिन्न अखाड़ों और संत शिविरों में विद्या की देवी मां सरस्वती की विधिपूर्वक पूजा-अर्चना की गई। सुबह आठ बजे तक ही लगभग एक करोड़ चार लाख से अधिक श्रद्धालु संगम में स्नान कर चुके थे, जबकि मेला प्रशासन का अनुमान है कि 26 जनवरी तक यह संख्या साढ़े तीन करोड़ के पार जा सकती है।
ज्योतिष के अनुसार इस वर्ष बसंत पंचमी का विशेष महत्व है। माघ मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि पर गजकेसरी योग के साथ शिवयोग का दुर्लभ संयोग बन रहा है, जिससे इस दिन का पुण्यफल और अधिक बढ़ गया है। मान्यता है कि इस शुभ दिन पवित्र नदियों में स्नान करने से बुद्धि का विकास होता है और इच्छाएं पूर्ण होती हैं। साधकों, विद्यार्थियों और कल्पवासियों को पीले वस्त्र पहनकर तथा पीला चंदन लगाकर स्नान करने की परंपरा निभाते देखा गया। ब्रह्म मुहूर्त से ही श्रद्धालु पूरे दिन इस पावन स्नान का लाभ प्राप्त कर रहे हैं।
श्रद्धालुओं की सुविधा और सुरक्षा को देखते हुए माघ मेले में व्यापक व्यवस्थाएं की गई हैं। लगभग साढ़े तीन किलोमीटर लंबे स्नान घाट बनाए गए हैं और पूरे मेला क्षेत्र को 800 हेक्टेयर में फैलाकर सात सेक्टरों में बांटा गया है। इस वर्ष विशेष रूप से नौ पांटून पुलों का निर्माण किया गया है, जिससे आवागमन सुगम हुआ है।
सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ करने के लिए पूरे मेला क्षेत्र में 400 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए हैं, जिनमें 150 कैमरे अत्याधुनिक आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस तकनीक से लैस हैं। मेला क्षेत्र को प्लास्टिक मुक्त घोषित किया गया है और बेहतर यातायात के लिए कई किलोमीटर तक चकर प्लेटें बिछाई गई हैं। ठंड से राहत के लिए अलाव और रैन बसेरों की भी समुचित व्यवस्था की गई है।
सुरक्षा के दृष्टिकोण से पुलिस, पीएसी, पैरामिलिट्री फोर्स, यूपी एटीएस और एसटीएफ के जवान तैनात हैं। वहीं स्नान घाटों पर जल पुलिस, गोताखोरों के साथ एनडीआरएफ और एसडीआरएफ की टीमें लगातार निगरानी कर रही हैं, ताकि श्रद्धालु सुरक्षित और सुगम रूप से स्नान कर सकें।
