Dhanteras 2020: क्या है इस गादी बिछाने का शुभ मुहूर्त, 1 क्लिक में जानें संपूर्ण जानकारी

2020-11-11T11:20:44.983

शास्त्रों की बात, जानें धर्म के साथ
सनातन धर्म में जिस तरह दिवाली के त्यौहार का अधिक महत्व है। ठीक उसी प्रकार धरतेरस को भी खासा महत्वपूर्ण दिया जाता है। इस दिन को लेकर कई धार्मिक मान्यताएं व किंवदंतियां प्रचलित हैं। तो वहीं शास्त्रों में इससे जुड़े वर्णन की बात करें तो इस दिन आरोग्य के देवता भगवान धनवंतरि का समुद्र मंथन के दौरान प्राकट्य हुआ था। जिस कारण इस दिन इनकी खास प्रकार से पूजा आदि की जाती है। चूंकि देवी लक्ष्मी का और भगवान धनंवतरि का जन्म साथ में हुआ था इसलिए धनतेरस के दिन देवी लक्ष्मी और इनकी पूजा साथ में की जाती है। पुराणों आदि में इन्हें महान चिकित्सक कहा गया है, जिन्हें देव पद प्राप्त है। तो वहीं कुछ प्रचलित किंवदंतियों के अनुसार इन्हें भगवान विष्णु का अवतार भी किया गया है। इन्हीं सभी कारणों के चलते धनतेरस के दिन इनकी पूजा करना बेहद आवश्यक माना जाता है। 
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बता दें इनका प्राकट्य कार्तिक कृष्ण पक्ष की त्रयोदशी तिथि के दिन हुआ था, जिस कारण इस तिथि को 'धनतेरस' के रूप में मनाया जाता है। कहा जाता है जब भगवान धनंवतरि प्रकट हुए थे तो उनके हाथों में अमृत से भरा कलश था। चूंकि भगवान धन्वंतरि कलश लेकर प्रकट हुए थे इसलिए ही इस अवसर पर बर्तन आदि खरीदने की परंपरा है।

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार इस दिन विशेषकर कलश खरीदना शुभ माना जाता है। तो वहीं इस दिन खरीददारी करने से, उस खरीदी में 13 गुना वृद्धि होती है। इस खास अवसर पर धनिए के बीज खरीदकर रखने का अधिक महत्व है।  

मगर इनकी पूजा के लिए शुभ मुहूर्त का पता होना बहुत आवश्यक होता है। तो चलिए आपको बताते इस दिन इनकी पूजा का शुभ मुहूर्त क्या है। 

मत मतांतर से 12 और 13 नवंबर को धनतेरस का पर्व मनाया जाएगा। ऐसे में हम आपको इन दोनों दिनों से जुड़े शुभ मुहूर्त के बारे में बताने वाले हैं। 

धनतेरस के दिन गादी बिछाने व धन और आरोग्य के देवता भगवान धन्वंतरि की पूजा करने का विधान है। 
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गादी बिछाने व भगवान धन्वंतरि पूजन का शुभ मुहूर्त-
12 नवंबर की रात्रि 9:30 बजे के बाद से धनतेरस को लेकर खरीदारी की जा सकती है।12 नवंबर को खरीदारी के लिए शुभ मुहूर्त रात्रि 11:30 से 1:07 बजे और रात्रि 2:45 से अगले दिन सुबह 5:57 तक है।
 13 नवंबर को सुबह 8.02 से 9.25 तक लाभ का चौघड़िया
13 नवंबर को सुबह 9.25 से 10.48 तक अमृत का चौघड़िया रहेगा
13 नवंबर को दोपहर 12.11 से 13.34 तक शुभ का चौघड़िया रहेगा और यह समय गादी बिछाने हेतु उत्तम है।

पूजन का समय- 
13 नवंबर को चंचल चौघड़िया में 16.19 (4 बजकर 19 मिनट) से 17.42 (5 बजकर 42 मिनट) तक का समय पूजन व दीप जलाने के लिए उत्तम रहेगा। अपनी सुविधानुसार इस समय भी गादी बिछा सकते हैं।

अक्सर देखा जाता है कि इस दौरान यानि धनतेरस के शुभ मौके पर लगभग हर कोई सोना-चांदी व धन-वैभव अपने घर लाने में तत्परता होते हैं। ऐसे में लोग अपनी सेहत को भूल जाते हैं।

शास्त्रों में असली सुख निरोगी काया को कहा गया है, जिसे पाने के बाद ही व्यक्ति अन्य सुख का लाभ महसूस कर सकता है। 
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इसलिए इस दिन पूरा समय केवल खरीददारी में न बिताएं, बल्कि आरोग्य के देवता धनंवतरि की पूजा-अर्चना करें तथा दैनिक जीवन में संयम-नियम आदि का पालन करें। क्योंकि अगर स्वास्थ्य होगा तो लक्ष्मी भी होगी। 

उपरोक्त बताए अनुसार देवी लक्ष्मी सागर मंथन से उत्पन्न हुई थीं, तो वहीं उसी तरह भगवान धनवंतरि भगवान भी अमृत कलश के साथ सागर मंथन से उत्पन्न हुए हैं। हालांकि देवी लक्ष्मी धन की देवी हैं, परंतु उनकी कृपा प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य और लंबी आयु का होना भी ज़रूरी है। इसलिए दीपावली के पहले यानि धनतेरस से ही दीपमालाएं सजने लगती हैं।
 


Jyoti

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