Chhinmasta Jayanti 2026: चिंतपूर्णी में माता छिन्नमस्तिका जयंती धूमधाम से संपन्न, विश्व शांति के लिए दुर्गा सप्तशती पाठ व हवन आयोजित
punjabkesari.in Thursday, Apr 30, 2026 - 01:21 PM (IST)
Chhinmasta Jayanti 2026: उत्तरी भारत के सुप्रसिद्ध धार्मिक स्थल माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर में माता छिन्नमस्तिका जयंती धूमधाम से मनाई गई। माता छिन्नमस्तिका जयंती के अवसर पर माता श्री चिंतपूर्णी मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों से सजाया गया। वहीं माता की पवित्र पिंडी का भी विशेष श्रृंगार किया गया। छिन्नमस्तिका जयंती पर देश के कोने कोने से आये श्रद्धालुओं ने माता श्री चिंतपूर्णी की पवित्र पिंडी के दर्शन किये और मां के चरणों में नतमस्तक होकर अपनी मनोकामनाएं मांगी। वहीं इस अवसर पर मंदिर के पुजारियों द्वारा विश्व शान्ति के लिए दुर्गा सप्तशती का पाठ और हवन यज्ञ भी किया गया।

प्रसिद्ध शक्तिपीठ माता चिंतपूर्णी के मंदिर में छिन्नमस्तिका जयंती धूमधाम से मनाई गई। छिन्नमस्तिका जयंती के उपलक्ष्य में मंदिर को रंग-बिरंगे फूलों से दुल्हन की तरह सजाया गया था। वहीं माता की जयंती के मौके पर श्रद्धालुओं ने भी बड़ी संख्या में पहुंचकर पावन पिंडी के दर्शन करते हुए मां के दरबार में शीश नवाया और जनकल्याण के लिए प्रार्थना की।
हर वर्ष की तरह इस वर्ष भी पुजारियों द्वारा 24 घंटे का महायज्ञ आयोजित किया गया। पुजारियों ने दुर्गा सप्तशती एवं हवन यज्ञ कर विश्वशांति की कामना की।

पौराणिक मान्यता के अनुसार जब भगवान विष्णु ने मां सती के जलते हुए शरीर के 51 हिस्से कर दिए थे तो इस स्थान पर देवी सती के चरण गिरे थे। चिंतपूर्णी में निवास करने वाली देवी को छिन्नमस्तिका के नाम से भी जाना जाता है। मारकंडे पुराण के अनुसार, देवी चंडी ने राक्षसों को एक भीषण युद्ध में पराजित कर दिया था, लेकिन उनकी दो योगिनियां (जया और विजया) युद्ध समाप्त होने के पश्चात भी रक्त की प्यासी थी, जया और विजया को शांत करने के लिए देवी चंडी ने अपना सिर काट लिया और उनकी खून की प्यास बुझाई थी।
पौराणिक परंपराओं के अनुसार भगवान शिव छिन्नमस्तिका देवी की रक्षा चारों दिशाओं से करते हैं। पूर्व में कालेश्वर महादेव, पश्चिम में नारायण महादेव, उत्तर में मुचकुंद महादेव और दक्षिण में शिवबाड़ी है। ये सभी मंदिर चिंतपूर्णी मंदिर से बराबर की दूरी पर स्थित हैं।
कहा जाता है चिंतपूर्णी, देवी छिन्नमस्तिका का निवास स्थान है। मंदिर के पुजारी रोहन कालिया ने बताया कि जब माता की छिन्नमस्तिका के रूप में उत्पत्ति हुई, तब से यह इस दिवस को छिन्नमस्तिका जयंती के रूप में मनाया जाता है। उन्होंने सभी श्रद्धालुओं को माता श्री छिन्नमस्तिका जयंती की बधाई देते हुए माता से जगत कल्याण के लिए भी प्रार्थना की।

