Char Dham Yatra 2026 : चारधाम मार्ग पर अब रात 10 बजे के बाद थमेगा पहियों का शोर, यात्रियों की सुरक्षा के लिए बदले नियम

punjabkesari.in Saturday, Apr 04, 2026 - 08:49 AM (IST)

Char Dham Yatra 2026 : उत्तराखंड में आगामी 19 अप्रैल 2026  से शुरू हो रही चारधाम यात्रा के लिए प्रशासन ने नए और सख्त गाइडलाइंस लागू किए हैं। पहाड़ी रास्तों पर होने वाली दुर्घटनाओं को रोकने के लिए अब वाहनों के संचालन के समय में बदलाव किया गया है।

क्या हैं नए नियम?
रात्रि प्रतिबंध:
यात्रा मार्गों पर रात 10:00 बजे से सुबह 04:00 बजे के बीच वाहनों के चलने पर पूर्ण पाबंदी रहेगी। कुछ विशेष संवेदनशील मार्गों पर यह प्रतिबंध शाम 08:00 बजे से भी लागू हो सकता है।

ग्रीन कार्ड अनिवार्य: किसी भी व्यावसायिक वाहन को बिना ग्रीन कार्ड के ऋषिकेश से आगे जाने की अनुमति नहीं होगी। यह कार्ड वाहन की फिटनेस और ड्राइवर के दस्तावेजों की जांच के बाद ही जारी किया जा रहा है।

ट्रैकिंग और जीपीएस: सरकार यात्रियों की सुरक्षा के लिए मोबाइल जीपीएस के जरिए वाहनों की लोकेशन ट्रैक करेगी ताकि आपात स्थिति में तुरंत मदद पहुंचाई जा सके।

क्यों लिया गया यह फैसला?
दुर्घटनाओं पर लगाम:
रात के समय पहाड़ों पर Visibility कम हो जाती है और जंगली जानवरों का खतरा भी बना रहता है।

ड्राइवरों को आराम: लगातार ड्राइविंग से होने वाली थकान के कारण होने वाले हादसों को कम करने के लिए यह अनिवार्य विश्राम समय तय किया गया है।

जाम से मुक्ति: सुबह-सुबह ट्रैफिक को व्यवस्थित तरीके से छोड़ने के लिए चेक पोस्ट पर भीड़ को नियंत्रित करना आसान होगा।

इन बसों के प्रवेश पर रहेगी रोक 
ऐसी बसें जिनकी चौड़ाई 2570 मिलीमीटर से ज्यादा है या जिनका व्हील बेस (पहियों के बीच की दूरी) 4500 मिलीमीटर से अधिक है, उन्हें पहाड़ी मार्गों पर जाने की अनुमति नहीं होगी। इन मानकों से बड़े वाहनों को हरिद्वार या ऋषिकेश के पार्किंग स्थलों पर ही रोक दिया जाएगा। बड़े वाहनों से आने वाले यात्रियों को ऋषिकेश से छोटी बसों या टैक्सियों के माध्यम से आगे की यात्रा पूरी करनी होगी।

ड्राइवरों के लिए अनिवार्य कोड ऑफ कंडक्ट
ड्रेस कोड और सुरक्षा:
वाहन चलाते समय चालक के लिए जूते पहनना अनिवार्य है (चप्पल या सैंडल पहनकर गाड़ी चलाने की अनुमति नहीं होगी)।

स्वास्थ्य परीक्षण: केवल उन्हीं चालकों को स्टेयरिंग संभालने दिया जाएगा जिनके पास वैध मेडिकल फिटनेस सर्टिफिकेट होगा।

मार्ग का ज्ञान (Training): मैदानी इलाकों या अन्य राज्यों से आने वाले बाहरी चालकों को सीधे पहाड़ों पर जाने की इजाजत नहीं मिलेगी। उन्हें पहले पहाड़ी रास्तों का विशेष प्रशिक्षण (Route Orientation) लेना होगा।

अनुभव को प्राथमिकता: यात्रा मार्ग पर केवल उन्हीं ड्राइवरों को अनुमति दी जाएगी जिनके पास पहाड़ी ढलानों और घुमावदार रास्तों पर गाड़ी चलाने का पर्याप्त अनुभव है।

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Content Editor

Sarita Thapa

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