BR Ambedkar Death Anniversary: भारत को विकसित बनाना चाहते थे ‘बाबा साहब’

punjabkesari.in Monday, Dec 06, 2021 - 02:22 PM (IST)

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डा. भीमराव अम्बेदकर जी का जन्म 14 अप्रैल, 1891 ई. को मध्य प्रदेश के महू में माता भीमा बाई और पिता सूबेदार रामजी के घर हुआ। उनके जन्म के समय भारत की सामाजिक परिस्थितियां बहुत भयंकर थीं। जातिवादी व्यवस्था की कठोर चक्की में पिस कर कई बार अपमानित होने के बावजूद बाबा साहब ने कठोर परिश्रम, कड़ी मेहनत और दृढ़ साहस के साथ राष्ट्र को सबसे उत्तम स्थान देते हुए इसकी मजबूती के लिए अपना तथा अपने परिवार का जीवन समर्पित कर दिया। 

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बाबा साहब भारत को आधुनिक और आत्मनिर्भर देश बनाना चाहते थे, इसीलिए उन्होंने हर भारतीय के शिक्षित होने का आह्वान किया, देश में धर्म तथा जाति के नाम पर दंगे न हों इसलिए उन्होंने सबसे इकट्ठे होकर देश की उन्नति के लिए संघर्ष करने का आह्वान किया। 

 

उद्योगों को बढ़ावा देने के लिए मजदूरों को आगे बढ़ाने के उद्देश्य से उन्होंने समय की सरकारों को कई महत्वपूर्ण सुझाव दिए। वह कृषि को देश का प्रमुख आय का स्रोत बनाना चाहते थे इसलिए उन्होंने ज्यादा से ज्यादा बिजली पैदा करने, नहरों को आपस में जोड़ने और बारिश के पानी का संचय करके कृषि करने के लिए योजनाओं पर भी हमेशा जोर दिया। 

इस तरह वह देश को सूखे और बाढ़ दोनों से छुटकारा दिलाने के साथ ही किसानों को पानी और बिजली की पूर्ण सुविधाएं प्रदान करना चाहते थे। बाबा साहब देश के लिए जीने वाले लोगों से अथाह प्रेम करते थे। वह हर नागरिक की आजादी, सुरक्षा और तरक्की के लिए हमेशा प्रयत्नशील रहते थे। 

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उन्होंने भारत का संविधान बनाने वाली ड्राफ्टिंग कमेटी के चेयरमैन का पद ग्रहण करने के बाद कड़ी मेहनत से 2 साल 11 महीने 18 दिन में देश का संविधान तैयार किया जिसका मूल रूप से अभिप्राय यह था कि देश का हर नागरिक अपनी हर तरह की आजादी का आनंद प्राप्त करे और सामाजिक तौर पर सभी बराबर हों, एक मनुष्य को दूसरे मनुष्य की लूट से बचाया जा सके, राष्ट्र का धर्म सबसे उत्तम धर्म है। 

उन्होंने पं. जवाहर लाल नेहरू से लिखित रूप में मांग की थी कि वह उन्हें योजना मंत्री बनाएं क्योंकि वह बड़े दूरदर्शी और दुनिया के माने हुए अर्थशास्त्रियों में एक थे। वह भली-भांति जानते थे कि हमारा देश कृषि प्रधान है, हमारे यहां हर तरह के खनिज पदार्थ के भंडार हैं इसलिए हमें आत्मनिर्भर बन कर विश्व का सिरमौर होने से कोई रोक नहीं सकता लेकिन अफसोस कि दुनिया के सर्वश्रेष्ठ विद्वानों में से एक होने के बावजूद बाबा साहब की सुध समय की सरकारों ने नहीं ली। 

अगर सरकारों ने उनके सुझावों को दरकिनार न किया होता तो आजादी के बाद से लेकर अब तक भारत का इतिहास कुछ अलग ही होता और न ही आज हमारे देश की इतनी बड़ी आबादी होती क्योंकि बाबा साहब जनसंख्या नियंत्रण कानून बनाने के लिए भी प्रयासरत थे लेकिन देश को विकसित बनाने का सपना मन में ही लेकर 6 दिसम्बर, 1956 को बाबा साहब हम सबसे विदा होकर कुदरत में लीन हो गए। 

उनके जीवन से प्रेरणा लेकर सच्चे मन से हमें यह संकल्प लेना चाहिए कि देश में संविधान का शासन होना चाहिए। अगर देश में संविधान का शासन नहीं हुआ तो वह दिन दूर नहीं जब हमारा लोकतंत्र धीरे-धीरे भीड़तंत्र बन जाएगा जो हर मनुष्य और राष्ट्र के हर संगठन के लिए बड़ा नुक्सान होगा।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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