Bhagat Singh Birth Anniversary: फांसी के फंदे से ठीक पहले जानिए शहीद-ए-आजम भगत सिंह के दिल की अंतिम बात
punjabkesari.in Monday, Sep 28, 2026 - 10:34 AM (IST)
Bhagat Singh Birth Anniversary 2026: भारत की आजादी की लड़ाई में अमर योगदान देने वाले महान क्रांतिकारी शहीद भगत सिंह का जन्म 28 सितंबर, 1907 को लायलपुर जिले के बंगा गांव (मौजूदा पाकिस्तान) में हुआ था। उनका पैतृक घर पंजाब के नवांशहर जिले के खटकड़ कलां में स्थित है। पिता किशन सिंह और माता विद्यावती के पुत्र भगत सिंह ने अपनी प्राथमिक शिक्षा लायलपुर के जिला बोर्ड प्राथमिक स्कूल से प्राप्त की और बाद में डी.ए.वी. स्कूल लाहौर में दाखिला लिया। लाहौर के नेशनल कॉलेज में वे नाटक समिति के सक्रिय सदस्य रहे। उन्हें उर्दू, हिंदी, पंजाबी, अंग्रेजी और संस्कृत भाषा पर बेहतरीन पकड़ हासिल थी तथा वे अपने पिता को उर्दू में ही पत्र लिखा करते थे।

समाजवादी विचार और दिल्ली असेंबली बम कांड भगत सिंह हिंसा और खून-खराबे के सख्त खिलाफ थे। वे कार्ल मार्क्स के विचारों से प्रभावित तथा समाजवाद के समर्थक थे। ब्रिटिश हुकूमत की नीतियों का विरोध करने और भारतीय जनता के दिलों में आजादी की अलख जगाने के उद्देश्य से भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने दिल्ली असेंबली में बम फेंकने की योजना बनाई।
योजना के तहत 8 अप्रैल, 1929 को उन्होंने असेंबली के खाली स्थान पर बम फेंका। घटना के बाद दोनों भागे नहीं, बल्कि वहीं खड़े होकर "इंकलाब जिंदाबाद" के नारे लगाने लगे, जिसके बाद पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया।
23 मार्च 1931 को फांसी से पहले जेल में साथी से कहे ऐतिहासिक शब्द मामले की सुनवाई के बाद भगत सिंह, सुखदेव और राजगुरु को फांसी की सजा सुनाई गई। ब्रिटिश सरकार ने तय समय से एक दिन पहले 23 मार्च, 1931 को ही तीनों को फांसी दे दी।
फांसी से पहले जेल की कोठरी में भगत सिंह ने अपने साथी शिव वर्मा से कहा था- "जब मैंने इंकलाब के रास्ते में पहला कदम रखा था तो सोचा था कि यदि मैं अपनी जान देकर भी इंकलाब जिंदाबाद का नारा देश के कोने-कोने में फैला सकूं तो समझूंगा कि मेरी जिंदगी की कीमत पड़ गई। आज जब मैं फांसी की सजा के लिए जेल कोठरी की सलाखों पीछे बंद हूं तो मैं देश के करोड़ों लोगों की गरजदार आवाज में नारे सुन सकता हूं। एक छोटी-सी जिंदगी की इससे बड़ी कीमत और हो भी क्या सकती है।"

