Anant Chaturdashi: जानिए क्यों कहलाते हैं भगवान विष्णु 'अनंत', कम ही लोगों को पता है ये पौराणिक रहस्य!
punjabkesari.in Friday, Sep 25, 2026 - 10:45 AM (IST)
Anant Chaturdashi katha: भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि सनातन परंपरा में विशेष स्थान रखती है। इस पावन अवसर पर गणपति विसर्जन के साथ-साथ अनंत चतुर्दशी का पर्व अत्यंत श्रद्धा और भाव के साथ मनाया जाता है। शास्त्रों के अनुसार, इस दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूपों की उपासना का विधान है। भगवान श्री हरि विष्णु सनातन परब्रह्म परमात्मा, समस्त जीवों के एकमात्र स्वामी और परम आश्रय हैं।
त्रिगुणमयी लीला और त्रिदेव रूप
भगवान विष्णु प्रकृति के तीनों गुणों—सत्व, रज और तम से परे (निर्गुण) हैं, परंतु संसार के कल्याण हेतु वे अपनी योगमाया से इन गुणों को स्वीकार कर भांति-भांति की लीलाएं रचाते हैं। सृष्टि की रचना हेतु वे रजोगुण स्वीकार कर ब्रह्मा रूप धारण करते हैं। संसार के पालन हेतु सत्वगुण के साथ स्वयं विष्णु रूप में स्थित रहते हैं। प्रलय एवं संहार हेतु तमोगुण स्वीकार कर महेश (शिव) रूप धारण करते हैं। समुद्र मंथन के समय प्रकट हुईं भगवती लक्ष्मी जी ने समस्त सद्गुणों के धाम भगवान विष्णु को ही अपने चिर-अभीष्ट वर के रूप में चुना। देवी लक्ष्मी ने ही धरा धाम पर सीता और रुक्मिणी के रूप में अवतरित होकर अपने स्वामी की निष्काम सेवा की।
शरणागत वत्सलता और भृगु ऋषि का प्रसंग
भगवान विष्णु अत्यंत दयालु और भक्तवत्सल हैं। पौराणिक कथा के अनुसार, भृगु ऋषि की पुत्री ने भगवान की कठोर तपस्या की थी। एक बार जब भृगु ऋषि ने योगनिद्रा में लीन भगवान विष्णु के वक्षस्थल पर प्रहार किया, तब भी भगवान ने क्रोधित होने के बजाय अति विनम्रता से ऋषि के चरण सहलाए और पूछा, "हे ब्राह्मण! आपके पैर में कोई चोट तो नहीं आई?"
भगवान के इस अगाध विनम्र भाव को देखकर भृगु मुनि अत्यंत लज्जित हुए। शास्त्रों में उल्लेख है कि गणिका और अजामिल जैसे जीव भी श्री हरि की शरण में आकर संसार के समस्त कर्मबंधनों से मुक्त हो गए।

क्षीरसागर निवास और अलौकिक धाम
भगवान श्री हरि विष्णु क्षीर सागर में माता लक्ष्मी के साथ शेषनाग की शैया पर निवास करते हैं। उनका परम धाम ऐसा दिव्य स्थान है, जिसे सूर्य, चंद्रमा या अग्नि का प्रकाश प्रकाशित नहीं कर सकता। ब्रह्मा, इंद्र, रुद्र, वरुण और मरुद्गण तथा सामवेद के गायक निरंतर जिनकी स्तुति करते हैं, वे शांत स्वरूप, कमलनयन और मेघवर्ण भगवान विष्णु ही जीवों को मोक्ष प्रदान करने वाले हैं।
श्रीकृष्ण अवतार और गीता का अमर संदेश
धर्म की स्थापना और दुष्टों के संहार के लिए भगवान विष्णु ने कंस के कारागार में देवकी और वासुदेव के पुत्र श्री कृष्ण के रूप में अवतार लिया। उन्होंने वृंदावन में दिव्य बाल लीलाएं कीं और कुरुक्षेत्र के युद्ध क्षेत्र में अपने सखा अर्जुन को निमित्त बनाकर समस्त ग्रंथों का सार श्रीमद्भागवत गीता के रूप में दिया।
क्यों कहलाते हैं वे 'अनंत'?
भगवान विष्णु की कथाएं, लीलाएं और स्वरूप असीम तथा अंतहीन हैं, इसी कारण उन्हें 'अनंत' कहा जाता है। जो भक्त सदैव उनके पावन नामों गोविंद, पुंडरीकाक्ष, माधव, मधुसूदन, नारायण, हरि, वासुदेव, श्री कृष्ण और गोपाल का स्मरण करता है, वह समस्त संकटों को पार कर भगवान की पराभक्ति और परम पद को प्राप्त करता है।

