Bajreshwari Devi Temple Kangra: कांगड़ा के इस मंदिर में 'रोते' हैं बाबा काल भैरव, क्या है प्रतिमा से गिरते आंसुओं का 5 हजार साल पुराना रहस्य?

punjabkesari.in Monday, Apr 13, 2026 - 01:05 PM (IST)

Himachal Pradesh Mysteries Nagarkot Temple: देवभूमि हिमाचल प्रदेश अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ-साथ अपने रहस्यमयी मंदिरों के लिए भी विश्व विख्यात है। इसी पावन भूमि के कांगड़ा जिले में स्थित है 'श्री बज्रेश्वरी देवी मंदिर'। यह मंदिर न केवल अपनी भव्यता के लिए जाना जाता है, बल्कि यहां स्थित भगवान काल भैरव की एक ऐसी प्रतिमा है, जिसे देखकर वैज्ञानिक भी हैरान हैं।

जब आपदा आने वाली होती है, तो 'रो' पड़ते हैं काल भैरव। स्थानीय मान्यताओं और मंदिर के पुजारियों के अनुसार, जब भी कांगड़ा या आसपास के इलाकों में कोई बड़ी आपदा, महामारी या संकट आने वाला होता है, तो मंदिर में स्थापित बाबा काल भैरव की 5 हजार साल पुरानी प्रतिमा की आंखों से आंसू बहने लगते हैं।

स्थानीय लोग इसे एक गंभीर चेतावनी या 'अपशकुन' मानते हैं। इतिहास गवाह है कि 1976-77 में जब इस प्रतिमा से आंसू और पसीना निकला था, उसके तुरंत बाद कांगड़ा बाजार में भीषण अग्निकांड हुआ था।

पांडवों ने एक ही रात में किया था निर्माण पौराणिक कथाओं के अनुसार, इस भव्य मंदिर का निर्माण महाभारत काल में पांडवों ने किया था। कहा जाता है कि माता दुर्गा ने पांडवों को स्वप्न में दर्शन देकर 'नगरकोट' (कांगड़ा) में मंदिर बनाने का आदेश दिया था ताकि वे सुरक्षित रह सकें। नागर शैली में बना यह मंदिर 51 शक्तिपीठों में से एक है, जहां माता सती का दाहिना वक्षस्थल गिरा था, इसलिए इसे 'स्तनपीठ' भी कहा जाता है।

क्या है आंसुओं के पीछे का वैज्ञानिक तर्क?
जहां भक्तों की अटूट आस्था इसे ईश्वरीय संकेत मानती है, वहीं वैज्ञानिकों का एक अलग नजरिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि प्रतिमा जिस पत्थर या रसायन से बनी है, वह नमी (moisture) के संपर्क में आने पर प्रतिक्रिया देता है, जिससे एक तरल पदार्थ निकलता है जो आंसू जैसा प्रतीत होता है।

 हालांकि, मंदिर के पुजारी इन मौकों पर विशेष हवन और पूजा-अर्चना करते हैं ताकि आने वाले संकटों को टाला जा सके। इतिहास की परतों में लिपटा वैभव यह मंदिर कभी इतना वैभवशाली था कि इसे महमूद गजनवी ने 5 बार लूटा था।

1905 के विनाशकारी भूकंप में मंदिर पूरी तरह ध्वस्त हो गया था, जिसे 1920 के आसपास दोबारा बनाया गया। मंदिर के प्रवेश द्वार पर बना 'नगारखाना' और इसकी किले जैसी दीवारें आज भी इसकी ऐतिहासिक वास्तुकला की गवाही देती हैं।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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