Amalaki Ekadashi: हजार गायों के दान के बराबर पुण्यफल चाहते हैं तो आमलकी एकादशी पर करें ये काम

punjabkesari.in Friday, Feb 20, 2026 - 10:38 AM (IST)

Amalaki Ekadashi 2026: हिंदू पंचांग के अनुसार फाल्गुन मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को आमलकी (आंवला) एकादशी के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2026 में 27 फरवरी को यह पावन तिथि विशेष आध्यात्मिक महत्व लेकर आएगी। एकादशी का दिन भगवान विष्णु की आराधना के लिए समर्पित माना जाता है और आमलकी एकादशी पर आंवले के वृक्ष की पूजा का भी विशेष विधान है।

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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इस दिन विधि-विधान से पूजा करने पर हजार गायों के दान के बराबर पुण्यफल प्राप्त होता है। श्रद्धा और नियमपूर्वक किए गए कुछ विशेष उपाय जीवन के कष्टों को दूर कर सुख-समृद्धि प्रदान कर सकते हैं।

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आमलकी एकादशी का धार्मिक महत्व
शास्त्रों में वर्णित है कि भगवान श्रीहरि आंवले के वृक्ष में निवास करते हैं। इसी कारण इस दिन आंवले के पेड़ और उसके फल की पूजा का विशेष महत्व माना गया है। व्रत, दान और जप-तप के माध्यम से भक्त भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करने का प्रयास करते हैं।

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आंवले की पूजा से मिलेगा पुण्यफल
आमलकी एकादशी के दिन भगवान विष्णु के साथ आंवले के वृक्ष की पूजा करना शुभ माना गया है। पूजा में आंवले का फल अर्पित करें। संभव हो तो आंवले का पौधा लगाएं। आंवले का दान करना भी पुण्यकारी माना जाता है। मान्यता है कि ऐसा करने से जीवन के दोष दूर होते हैं और सकारात्मक फल प्राप्त होते हैं।

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तुलसी पूजा का विशेष महत्व
भगवान विष्णु को तुलसी अत्यंत प्रिय है। आमलकी एकादशी पर तुलसी पत्र अर्पित करना विशेष फलदायी माना गया है। तुलसी जी के समक्ष शुद्ध घी का दीपक जलाकर इस मंत्र का जाप करना शुभ बताया गया है:

"महाप्रसाद जननी, सर्व सौभाग्यवर्धिनी। आधि व्याधि हरा नित्यं, तुलसी त्वं नमोस्तुते।"

श्रद्धा से किए गए इस जप से साधक की मनोकामनाएं पूर्ण होने की मान्यता है।

पीला चंदन बढ़ाएगा सौभाग्य
भगवान विष्णु को पीला चंदन और गोपी चंदन अति प्रिय है। आमलकी एकादशी के दिन:
भगवान को चंदन से ऊर्ध्वपुंड्र तिलक लगाएं।
पूजा के बाद वही चंदन अपने माथे पर धारण करें।
मान्यता है कि यह उपाय भाग्य को प्रबल बनाता है और जीवन के कष्टों को कम करने में सहायक होता है।

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शंख से करें अभिषेक
विष्णु पूजा में शंख का विशेष स्थान है। आमलकी एकादशी पर दक्षिणावर्ती या सामान्य शंख में कच्चा दूध और गंगा जल भरें।
भगवान विष्णु या शालिग्राम का अभिषेक करें। पूजा के दौरान शंखनाद अवश्य करें। धार्मिक विश्वास है कि इससे घर में सुख-शांति और समृद्धि का वास होता है।

आमलकी एकादशी श्रद्धा, संयम और भक्ति का पर्व है। इस दिन किए गए व्रत, जप और उपाय आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ मानसिक शांति प्रदान करने वाले माने जाते हैं। हालांकि धार्मिक उपाय आस्था पर आधारित होते हैं, लेकिन सकारात्मक भावना और सत्कर्म जीवन में सदैव शुभ फल देने वाले होते हैं।

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Content Writer

Niyati Bhandari

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