Gold Prcie को लेकर विशेषज्ञों का नया अनुमान, क्या 70 हजार तक फिसलेगा सोना?

punjabkesari.in Thursday, Feb 05, 2026 - 10:44 AM (IST)

बिजनेस डेस्कः सोने की कीमतों में लगातार उतार-चढ़ाव ने आम खरीदारों की चिंता बढ़ा दी है। कभी तेज गिरावट तो कभी अचानक उछाल के कारण बाजार में असमंजस का माहौल बना हुआ है। खासकर शादी-विवाह के सीजन से पहले लोग यह तय नहीं कर पा रहे हैं कि अभी सोना खरीदें या कीमतों में संभावित गिरावट का इंतजार करें। इसी बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या सोने के दाम फिर से 70 हजार रुपए के स्तर से नीचे आ सकते हैं। आइए जानते हैं एक्सपर्ट्स का क्या कहना है और आगे सोने के बाजार का रुख कैसा रह सकता है।

कीमतों में आ सकती है गिरावट

बाजार विशेषज्ञों का कहना है कि सोने की कीमतों में गिरावट की संभावना के कई ठोस कारण हैं। विशेषज्ञों के अनुसार, मौजूदा वैश्विक आर्थिक परिस्थितियां सोने की कीमतों पर दबाव बना सकती हैं। अमेरिका में आर्थिक नीतियों और डॉलर की मजबूती का असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में दिख रहा है। आमतौर पर जब डॉलर मजबूत होता है, तो निवेशक सोने की बजाय अन्य निवेश विकल्पों की ओर रुख करते हैं, जिससे कीमतों में कमजोरी आ सकती है।

इसके अलावा, वैश्विक स्तर पर भू-राजनीतिक तनाव में कुछ नरमी आने से भी सोने की सुरक्षित निवेश के रूप में मांग कम हो रही है। रूस-यूक्रेन युद्ध और मध्य पूर्व तनाव के दौरान निवेशकों ने सोने को सुरक्षित विकल्प माना था लेकिन हाल के घटनाक्रमों के बाद कुछ निवेशक मुनाफावसूली कर रहे हैं और शेयर बाजार की ओर बढ़ रहे हैं। इससे सोने की कीमतों पर अतिरिक्त दबाव बन रहा है।

कीमतों के स्तर को लेकर विशेषज्ञों का कहना है कि अगर अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोना प्रमुख सपोर्ट स्तरों से नीचे जाता है और साथ ही रुपए में मजबूती आती है, तो घरेलू बाजार में भी कीमतों में गिरावट तेज हो सकती है। हालांकि, यह गिरावट अचानक नहीं बल्कि चरणबद्ध तरीके से होने की संभावना जताई जा रही है और आने वाले समय में बाजार में अस्थिरता बनी रह सकती है। विश्लेषकों का कहना है कि कुछ दिनों के लिए बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन कुल मिलाकर रुझान गिरावट की ओर है।

जल्दबाजी से बचें

ऐसे माहौल में विशेषज्ञ खरीदारों को सलाह दे रहे हैं कि वे जल्दबाजी से बचें और एकमुश्त खरीदारी करने के बजाय जरूरत के अनुसार चरणबद्ध तरीके से सोना खरीदें। उनका मानना है कि इस रणनीति से कीमतों के उतार-चढ़ाव का असर कम किया जा सकता है और बेहतर औसत कीमत पर खरीदारी संभव हो सकती है।

 


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Content Writer

jyoti choudhary

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