Dollar Crash: ट्रंप के बयान से डॉलर धड़ाम, 4 साल के निचले स्तर पर अमेरिकी मुद्रा
punjabkesari.in Wednesday, Jan 28, 2026 - 12:06 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः अमेरिकी डॉलर को जोरदार झटका लगा है और यह 2022 के बाद के सबसे निचले स्तर पर पहुंच गया। डॉलर में यह कमजोरी उस समय और गहरी हो गई, जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि उन्हें डॉलर के कमजोर होने से कोई परेशानी नहीं है।
आयोवा में मीडिया से बातचीत के दौरान ट्रंप ने कहा, “नहीं, मुझे यह ठीक लग रहा है। कारोबार को देखिए, डॉलर अच्छा कर रहा है।” उनके इस बयान के बाद बाजार में यह संदेश गया कि अमेरिकी प्रशासन कमजोर डॉलर के पक्ष में हो सकता है, जिससे डॉलर पर बिकवाली का दबाव और बढ़ गया।
ब्लूमबर्ग डॉलर इंडेक्स में बड़ी गिरावट
ब्लूमबर्ग डॉलर स्पॉट इंडेक्स करीब 1.2 फीसदी तक टूट गया और डॉलर सभी प्रमुख वैश्विक मुद्राओं के मुकाबले कमजोर पड़ गया। यह गिरावट पिछले साल टैरिफ लागू होने के बाद से डॉलर की सबसे बड़ी गिरावट मानी जा रही है।
एक रिपोर्ट के अनुसार, डॉलर इंडेक्स (DXY) में भी एक दिन में जोरदार गिरावट दर्ज की गई। छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की मजबूती मापने वाला यह इंडेक्स अप्रैल के बाद अब तक की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट पर पहुंच गया। इससे पहले 10 अप्रैल को डॉलर इंडेक्स करीब 2 फीसदी गिरा था, जब अमेरिका ने चीन पर 145 फीसदी टैरिफ लगाने की धमकी दी थी।
ट्रंप के बयान से क्यों बढ़ा डॉलर में गिरावट का खतरा?
विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप के बयान ने बाजारों को यह संकेत दिया है कि अमेरिका की सरकार कमजोर डॉलर को लेकर सहज है। इससे ट्रेडर्स को डॉलर बेचने का “ग्रीन सिग्नल” मिल गया।
विश्लेषकों के अनुसार, कमजोर डॉलर से अमेरिकी निर्यात को बढ़ावा मिलता है और अमेरिकी कंपनियों को वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक फायदा मिलता है। इसी वजह से ट्रंप की टिप्पणी के बाद डॉलर पर दबाव और बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
‘डॉलर की नई बिकवाली को न्योता’
बैंक ऑफ नासाउ के चीफ इकोनॉमिस्ट विन थिन ने ब्लूमबर्ग से कहा कि ट्रंप के बयान ने “डॉलर की एक और बिकवाली को न्योता दे दिया है” और आगे भी डॉलर कमजोर हो सकता है। उन्होंने बताया कि ट्रंप कैबिनेट के कई सदस्य कमजोर डॉलर के समर्थक हैं, ताकि अमेरिकी निर्यात को ज्यादा प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। हालांकि उन्होंने चेतावनी दी कि यह एक कैलकुलेटेड रिस्क है, क्योंकि अत्यधिक कमजोरी बाजार में अव्यवस्था पैदा कर सकती है।
येन की मजबूती से भी डॉलर दबाव में
इस बीच जापानी येन में आई मजबूती ने भी डॉलर पर दबाव बढ़ा दिया है। बाजार को उम्मीद है कि जापान सरकार अपनी मुद्रा को सहारा देने के लिए हस्तक्षेप कर सकती है, जिससे येन में रिकवरी देखने को मिल रही है और इसका असर डॉलर पर पड़ रहा है।
ट्रंप की नीतियों से बढ़ी बाजार की बेचैनी
विश्लेषकों का कहना है कि ट्रंप की अनिश्चित और आक्रामक नीतियों ने वैश्विक बाजारों में अस्थिरता बढ़ा दी है। ग्रीनलैंड को लेकर बयान, फेडरल रिजर्व पर दबाव, टैक्स कटौती से बढ़ता घाटा और उनकी नेतृत्व शैली—इन सभी कारणों से निवेशक और अमेरिका के सहयोगी देश असहज महसूस कर रहे हैं।
बॉन्ड यील्ड बढ़ी, फिर भी डॉलर कमजोर
आमतौर पर बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी और ब्याज दरों में कटौती रुकने की उम्मीद डॉलर को सहारा देती है, लेकिन इस बार इसका उलटा असर देखने को मिला। निवेशक सुरक्षित निवेश की तलाश में सोने की ओर तेजी से बढ़े, जिससे सोना रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गया।
डॉलर को लेकर ट्रंप का विरोधाभासी रुख
ट्रंप लंबे समय से डॉलर को लेकर विरोधाभासी बयान देते रहे हैं। जहां एक ओर वह मजबूत डॉलर को अमेरिकी ताकत बताते हैं, वहीं कमजोर डॉलर को अमेरिकी मैन्युफैक्चरिंग के लिए फायदेमंद मानते हैं। मंगलवार को उन्होंने कहा कि वह डॉलर की कीमत को “यो-यो” की तरह ऊपर-नीचे कर सकते हैं, हालांकि उन्होंने यह भी माना कि अत्यधिक उतार-चढ़ाव ठीक नहीं है।
चीन-जापान पर मुद्रा डिवैल्यूएशन का आरोप
ट्रंप ने चीन और जापान पर जानबूझकर अपनी मुद्राओं को कमजोर करने का आरोप भी लगाया। उनका कहना है कि ये देश युआन और येन का बार-बार अवमूल्यन कर वैश्विक प्रतिस्पर्धा को प्रभावित कर रहे हैं।
डॉलर की कमजोरी के बीच निवेशकों का झुकाव सुरक्षित विकल्पों की ओर बढ़ा है, जिससे सोने की कीमतें रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई हैं।
