दुनिया के तेल बाजार में उथल-पुथल, कीमतें 150 डॉलर तक पहुंचने का खतरा

punjabkesari.in Thursday, Mar 05, 2026 - 01:58 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव का असर अब वैश्विक तेल बाजार पर साफ दिखाई देने लगा है। ईरान ने होरमुज जलडमरूमध्य को बंद करने की धमकी दी है, जो दुनिया में कच्चे तेल की आपूर्ति का एक अहम मार्ग माना जाता है। वैश्विक स्तर पर लगभग 20 प्रतिशत कच्चा तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। इसके साथ ही बड़ी मात्रा में तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की आपूर्ति भी इसी मार्ग से होती है। ऐसे में यदि यह रास्ता बाधित होता है तो वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ सकता है।

तेल की कीमतों को लेकर चेतावनी

इस बढ़ते खतरे को देखते हुए कई अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संस्थानों और ब्रोकरेज कंपनियों ने तेल की कीमतों को लेकर चेतावनी दी है। DBS बैंक का अनुमान है कि यदि होरमुज जलडमरूमध्य पूरी तरह बंद हो जाता है तो ब्रेंट क्रूड की कीमत 100 से 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है। 

वहीं गोल्डमैन सैक्स का कहना है कि अगर आपूर्ति लगभग पांच सप्ताह तक प्रभावित रहती है तो कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को छू सकती हैं। इस बीच ब्रेंट क्रूड पहले ही करीब 13 प्रतिशत की तेजी के साथ 82 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है, जो जनवरी 2025 के बाद का उच्चतम स्तर है। 

जेपी मॉर्गन चेस और बर्नस्टीन ने भी चेतावनी दी है कि अगर यह संघर्ष लंबा खिंचता है तो तेल की कीमतें 100 डॉलर से ऊपर जा सकती हैं।

अर्थव्यवस्था पर बढ़ सकता है दबाव 

इस स्थिति का सबसे ज्यादा असर उन देशों पर पड़ सकता है जो तेल आयात पर अधिक निर्भर हैं। भारत भी उनमें से एक है। भारत अपने करीब 50 प्रतिशत कच्चे तेल का आयात इसी मार्ग से करता है। अनुमान के मुताबिक हर दिन लगभग 26 लाख बैरल तेल होरमुज जलडमरूमध्य से होकर भारत पहुंचता है। ऐसे में यदि इस मार्ग पर लंबे समय तक व्यवधान रहता है तो भारत जैसे उभरते देशों की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ सकता है।

ING ग्रुप के अनुसार यदि तेल की कीमतों में सिर्फ 10 प्रतिशत की बढ़ोतरी होती है तो उभरती अर्थव्यवस्थाओं के चालू खाते का घाटा 0.40 से 0.60 प्रतिशत तक बढ़ सकता है। इससे महंगाई में तेजी आ सकती है और आर्थिक विकास की रफ्तार भी प्रभावित हो सकती है।

विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिका अपने रणनीतिक पेट्रोलियम भंडार का इस्तेमाल कर सकता है लेकिन यदि संकट गंभीर रूप लेता है तो यह कदम भी वैश्विक सप्लाई में आने वाली कमी को पूरी तरह पूरा नहीं कर पाएगा। फिलहाल कच्चे तेल की कीमतों की दिशा काफी हद तक अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव पर निर्भर है। जब तक हालात सामान्य होने के स्पष्ट संकेत नहीं मिलते, तब तक तेल बाजार में अस्थिरता और कीमतों में तेजी बनी रह सकती है।


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Content Writer

jyoti choudhary

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