ईरान-इजराइल जंग के बीच करेंसी मार्केट में मचा कोहराम, डॉलर के आगे रुपया लुढ़का
punjabkesari.in Monday, Mar 02, 2026 - 12:21 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः ईरान-इजराइल के बीच बढ़ते तनाव का असर अब सीधे भारतीय करेंसी मार्केट पर दिखाई देने लगा है। वैश्विक अनिश्चितता, कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल और अमेरिकी डॉलर की मजबूती के चलते रुपया दबाव में आ गया है। निवेशकों में बढ़ती चिंता और विदेशी फंड की निकासी ने हालात को और बिगाड़ दिया है, जिससे डॉलर के मुकाबले रुपया फिसलता नजर आ रहा है। जानकारों का मानना है कि यदि पश्चिम एशिया का संकट लंबा खिंचता है तो आने वाले दिनों में करेंसी बाजार में उतार-चढ़ाव और तेज हो सकता है।
सोमवार को भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले 21 पैसे गिरकर 91.29 पर पहुंच गया। शुरुआती कारोबार में रुपया 91.23 पर खुला था और दबाव बढ़ने के साथ और फिसल गया। इससे पहले शुक्रवार को यह 91.08 पर बंद हुआ था।
फॉरेक्स ट्रेडर्स के मुताबिक, इक्विटी बाजार में भारी गिरावट और विदेशी निवेशकों की बिकवाली ने भी रुपए पर दबाव बढ़ाया। आशंका जताई जा रही है कि यदि वैश्विक हालात और बिगड़ते हैं तो डॉलर के मुकाबले रुपया 92 के स्तर को भी पार कर सकता है।
गिरावट के प्रमुख कारण
1. डॉलर इंडेक्स में मजबूती
डॉलर इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले अमेरिकी डॉलर की ताकत को दर्शाता है, 0.22 फीसदी बढ़कर 97.78 पर पहुंच गया। मजबूत डॉलर उभरती अर्थव्यवस्थाओं की मुद्राओं पर दबाव डालता है।
2. कच्चे तेल की कीमतों में उछाल
ग्लोबल ऑयल बेंचमार्क Brent Crude फ्यूचर्स ट्रेड में करीब 3.91 फीसदी बढ़कर 76.78 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। कारोबारी सत्र के दौरान दाम 82 डॉलर प्रति बैरल के पार भी जाते दिखे। विश्लेषकों का कहना है कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान पर सैन्य कार्रवाई के बाद तेल बाजार में अस्थिरता बढ़ी है।
यदि कच्चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार करता है, तो इसका सीधा असर भारत के आयात बिल और रुपए पर पड़ेगा।
3. शेयर बाजार में भारी गिरावट
घरेलू इक्विटी बाजार में भी तेज गिरावट दर्ज की गई। BSE Sensex 2700 से अधिक अंक टूट गया, जबकि Nifty 50 में 533 अंकों की गिरावट दर्ज की गई। दोनों इंडेक्स करीब 11 महीने के निचले स्तर पर कारोबार करते दिखे।
एक्सचेंज डेटा के अनुसार, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने शुक्रवार को 7,536.36 करोड़ रुपये की इक्विटी बेची। विशेषज्ञों का मानना है कि मिडिल ईस्ट तनाव जारी रहने पर विदेशी फंड की निकासी और बढ़ सकती है।
4. फॉरेक्स रिजर्व में गिरावट
Reserve Bank of India के ताजा आंकड़ों के मुताबिक 20 फरवरी को समाप्त सप्ताह में भारत का विदेशी मुद्रा भंडार 2.119 अरब डॉलर घटकर 723.608 अरब डॉलर रह गया। इससे पहले यह 725.727 अरब डॉलर के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा था।
खतरा अभी बरकरार
मिडिल ईस्ट में हालात अब भी तनावपूर्ण बने हुए हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भारत अपनी करीब 85 फीसदी ईंधन जरूरत आयात से पूरी करता है, ऐसे में कच्चे तेल की कीमतों में तेज बढ़ोतरी से चालू खाता घाटा और राजकोषीय दबाव बढ़ सकता है।
यदि वैश्विक तनाव कम नहीं होता और तेल कीमतों में तेजी जारी रहती है, तो आने वाले दिनों में करेंसी मार्केट और शेयर बाजार दोनों में अस्थिरता बनी रह सकती है।
