Consumer Court: ग्राहक के खाते से कटे ₹1.64 लाख, कंज्यूमर कोर्ट ने SBI को दिया ₹1.89 लाख चुकाने का आदेश
punjabkesari.in Monday, Aug 03, 2026 - 11:20 AM (IST)
Consumer Court: पंजाब के एक कंज्यूमर फोरम (Consumer Court) ने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) को एक ग्राहक के 1.64 लाख रुपए वापस लौटाने का आदेश दिया। ग्राहक के पैसे एक अनऑथराइज़्ड ऑनलाइन बैंकिंग ट्रांज़ैक्शन हो गए थे। घटना के तुरंत बाद उसने बैंक शाखा, SBI हेल्पलाइन, नेशनल साइबर क्राइम पोर्टल और पुलिस में शिकायत दर्ज कराई लेकिन बैंक ने राशि वापस नहीं की। इसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग पहुंचा। कमीशन ने कहा कि बार-बार अनुरोध करने के बावजूद मामले को हल न करना सर्विस में कमी (deficiency in service) है।
क्या है आरोप?
शिकायतकर्ता ने आयोग को बताया कि उसने कभी भी अपना एटीएम पिन, OTP, इंटरनेट बैंकिंग लॉगिन या कोई अन्य गोपनीय जानकारी किसी के साथ साझा नहीं की। इसके बावजूद उसके खाते से बिना उसकी जानकारी के पैसे निकाल लिए गए। उसने यह भी आरोप लगाया कि बैंक ने शिकायत की निष्पक्ष जांच नहीं की और बिना विस्तृत जांच रिपोर्ट के उसका दावा खारिज कर दिया।
SBI ने क्या दी दलील?
SBI की ओर से दलील दी गई कि संबंधित लेन-देन ग्राहक के यूजरनेम, पासवर्ड और रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर भेजे गए OTP के बिना संभव नहीं था। SBI ने यह भी कहा कि ग्राहक की लापरवाही के कारण धोखाधड़ी हुई हो सकती है।
आयोग ने क्या कहा?
हालांकि, उपभोक्ता आयोग ने पाया कि बैंक ग्राहक की लापरवाही साबित करने के लिए कोई ठोस तकनीकी साक्ष्य जैसे सर्वर लॉग, IP एड्रेस, फोरेंसिक रिपोर्ट या अन्य इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्ड पेश नहीं कर सका। आयोग ने भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के 6 जुलाई 2017 के दिशानिर्देशों का हवाला देते हुए कहा कि यदि ग्राहक अनधिकृत लेन-देन की समय पर सूचना देता है, तो ग्राहक की लापरवाही साबित करने की जिम्मेदारी बैंक की होती है।
आयोग ने माना कि बैंक का दावा पर्याप्त कानूनी और तकनीकी साक्ष्यों के बजाय केवल अनुमान पर आधारित था। उपभोक्ता आयोग ने शिकायत स्वीकार करते हुए SBI को निर्देश दिया कि वह:
- ग्राहक को ₹1.64 लाख की पूरी राशि लौटाए।
- मानसिक उत्पीड़न और परेशानी के लिए ₹15,000 मुआवजा दे।
- मुकदमेबाजी के खर्च के रूप में ₹10,000 का भुगतान करे।
उपभोक्ता आयोग ने अपने फैसले में कहा कि जब कोई ग्राहक अनधिकृत बैंकिंग लेन-देन की तत्काल सूचना देता है, तो बैंक की जिम्मेदारी निष्पक्ष, पारदर्शी और विस्तृत जांच करना है। इस मामले में बैंक ऐसा करने में विफल रहा, इसलिए ग्राहक को राहत दी गई।
