Copper News: S&P ग्लोबल की चेतावनी, नई खदानें नहीं खुलीं तो बढ़ेगी तांबे की किल्लत
punjabkesari.in Friday, Jan 09, 2026 - 04:31 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः दुनिया भर में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (ए.आई.), डाटा सैंटर्स और रक्षा क्षेत्र में बढ़ते खर्च के चलते आने वाले वर्षों में तांबे (कॉपर) की भारी किल्लत पैदा होने की आशंका है। एस एंड पी ग्लोबल की ताजा रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर नई खदानें समय पर विकसित नहीं हुईं तो तांबा वैश्विक आर्थिक और तकनीकी विकास के लिए बड़ा संकट बन सकता है। रिपोर्ट के अनुसार ए.आई. डाटा सैंटर्स और रक्षा क्षेत्र से जुड़ी मांग साल 2040 तक करीब तीन गुना हो सकती है। अकेले इन सैक्टरों से तांबे की खपत में करीब 40 लाख मीट्रिक टन की अतिरिक्त बढ़ोतरी होने का अनुमान है।
2030 के बाद और गहराएगा संकट
इलैक्ट्रिक वाहन, रिन्यूएबल एनर्जी, बैटरी स्टोरेज और पावर ग्रिड विस्तार जैसे एनर्जी ट्रांजिशन सैक्टर पहले ही तांबे की मांग को तेजी से बढ़ा रहे हैं। आने वाले वर्षों में मांग का सबसे बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से आएगा। एक आकलन के मुताबिक वैश्विक तांबे की मांग 2030 तक करीब 3.3 करोड़ टन तक पहुंच सकती है जबकि खदानों में अयस्क की गुणवत्ता गिरने, परमिट और फंडिंग में दिक्कतों के कारण सप्लाई उतनी तेजी से नहीं बढ़ पाएगी।
1 करोड़ टन तक पहुंच सकता है अंतर
रिपोर्ट में चेतावनी दी गई है कि अगर हालात नहीं बदले तो 2040 तक तांबे की सप्लाई और डिमांड के बीच करीब 1 करोड़ टन का अंतर बन सकता है। हालांकि रिसाइकल्ड कॉपर की हिस्सेदारी बढ़कर 1 करोड़ टन तक पहुंच सकती है, फिर भी यह कमी पूरी नहीं कर पाएगी। लंदन मार्केट में तांबे की कीमतें पहले ही 13,000 डॉलर प्रति मीट्रिक टन के पार पहुंच चुकी हैं। अमेरिका में संभावित टैरिफ और स्टॉकपाइलिंग से भी कीमतों को सपोर्ट मिला है।
नई टैक्नोलॉजी भी बढ़ाएगी दबाव
एस एंड पी ग्लोबल ने भविष्य की एक और बड़ी मांग ह्यूमनॉइड रोबोट्स की ओर इशारा किया है। रिपोर्ट के मुताबिक अगर 2040 तक एक अरब ह्यूमनॉइड रोबोट इस्तेमाल में आते हैं, तो इसके लिए हर साल करीब 16 लाख मीट्रिक टन तांबे की जरूरत होगी। विशेषज्ञों का कहना है कि तांबे की नई खदानें विकसित करने में लंबा समय, बढ़ती लागत और सप्लाई चेन का अत्यधिक केंद्रीकरण इस संकट को और गंभीर बना सकता है। ए.आई., डिफेंस और ग्रीन एनर्जी की दौड़ में तांबा भविष्य का सबसे अहम और सबसे कमी वाला धातु बनता जा रहा है। अगर समय रहते सप्लाई नहीं बढ़ाई गई, तो यह संकट वैश्विक अर्थव्यवस्था की रफ्तार पर ब्रेक लगा सकता है।
