मिडिल ईस्ट तनाव का असर: कतर से भारत की LNG सप्लाई रुकी, GAIL ने दी कटौती की चेतावनी

punjabkesari.in Thursday, Mar 05, 2026 - 03:51 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर अब भारत की ऊर्जा सप्लाई पर भी दिखने लगा है। इजरायल-अमेरिका और ईरान के बीच जारी टकराव के कारण कतर से भारत को मिलने वाली तरलीकृत प्राकृतिक गैस (LNG) की सप्लाई फिलहाल रुक गई है। सरकारी गैस कंपनी GAIL (India) Limited ने बताया है कि हालात ऐसे ही बने रहे तो उसे अपने डाउनस्ट्रीम ग्राहकों के लिए गैस आपूर्ति में कटौती करनी पड़ सकती है।

कंपनी ने एक्सचेंज फाइलिंग में जानकारी दी कि उसके दीर्घकालिक सप्लायर Petronet LNG Limited ने 3 मार्च को फोर्स मेज्योर नोटिस जारी किया है। यह फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि कतर से भारत आने वाले एलएनजी जहाजों की आवाजाही में Strait of Hormuz में समुद्री नेविगेशन प्रतिबंधों के कारण गंभीर बाधाएं पैदा हो गई हैं। इसके अलावा कतर के Ras Laffan LNG Terminal में स्थित एलएनजी लिक्विफिकेशन प्लांट का संचालन भी अस्थायी रूप से रोक दिया गया है।

फाइलिंग के अनुसार, पेट्रोनेट के अपस्ट्रीम सप्लायर QatarEnergy ने भी क्षेत्र में बढ़ते सैन्य तनाव के चलते संभावित फोर्स मेजर की स्थिति की चेतावनी दी है। इसी वजह से पेट्रोनेट द्वारा गेल को मिलने वाला एलएनजी कोटा 4 मार्च 2026 से शून्य कर दिया गया है।

गेल ने कहा है कि वह स्थिति पर लगातार नजर रख रही है और जरूरत पड़ने पर अपने ग्राहकों को गैस सप्लाई में कटौती करने का फैसला लिया जा सकता है। हालांकि कंपनी ने यह भी स्पष्ट किया कि अन्य स्रोतों से मिलने वाली एलएनजी सप्लाई फिलहाल प्रभावित नहीं हुई है।

देश के गैस ट्रांसमिशन नेटवर्क में GAIL की 75% हिस्सेदारी

भारत में GAIL (India) Limited लगभग 11,400 किलोमीटर लंबे प्राकृतिक गैस पाइपलाइन नेटवर्क का संचालन करती है और गैस ट्रांसमिशन के क्षेत्र में करीब 75 प्रतिशत बाजार हिस्सेदारी रखती है। यह नेटवर्क देश के कई गैस स्रोतों को बड़े औद्योगिक उपभोक्ताओं और अन्य ग्राहकों से जोड़ता है।

एशिया में LNG की कीमतें तीन साल के उच्च स्तर के करीब

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का असर वैश्विक ऊर्जा बाजार में भी साफ दिख रहा है। एशिया में स्पॉट एलएनजी की कीमतें हाल ही में तीन साल के उच्च स्तर के करीब पहुंच गई थीं, हालांकि गुरुवार को इनमें कुछ नरमी आई और कीमत करीब 23.80 डॉलर प्रति मिलियन ब्रिटिश थर्मल यूनिट तक आ गई। इसके बावजूद यह स्तर पिछले सप्ताह की तुलना में अभी भी काफी ऊंचा बना हुआ है।

ऊर्जा बाजार में यह उथल-पुथल उस समय तेज हुई जब United States और Israel ने Iran पर संयुक्त हवाई हमला किया। इसके जवाब में ईरान ने खाड़ी क्षेत्र में मिसाइल और ड्रोन हमले किए, जिससे तेल और गैस सप्लाई को लेकर वैश्विक चिंता बढ़ गई है।

बाजार की सबसे बड़ी चिंता Strait of Hormuz को लेकर है, जो फारस की खाड़ी को अरब सागर से जोड़ने वाला दुनिया का सबसे अहम ऊर्जा समुद्री मार्ग माना जाता है। इसी रास्ते से मिडिल ईस्ट से बड़ी मात्रा में तेल और गैस दुनिया के कई देशों तक पहुंचती है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर मिडिल ईस्ट में तनाव लंबे समय तक जारी रहा तो वैश्विक ऊर्जा बाजार और अधिक अस्थिर हो सकता है, जिसका असर भारत जैसे आयात पर निर्भर देशों पर भी पड़ेगा।


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Content Writer

jyoti choudhary

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