हिजाब को अनुमति, बिंदी-तिलक पर रोक लगा धार्मिक भेदभाव में फंसी Lenskart, पीयूष बंसल ने दी सफाई
punjabkesari.in Thursday, Apr 16, 2026 - 01:29 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः आईवियर कंपनी लेंसकार्ट (Lenskart) को सोशल मीडिया पर लोगों के गुस्से का सामना करना पड़ रहा है। इसकी वजह है कंपनी का नया नियम। नए नियम के तहत कंपनी के कर्मचारी हिजाब तो पहन सकते हैं लेकिन वे बिंदी और तिलक नहीं लगा सकते। इससे लोग बेहद नाराज हैं और कंपनी पर धार्मिक भेद-भाव का आरोप लगा रहे हैं। इस मामले के तूल पकड़ते के बाद अब कंपनी के संस्थापक पीयूष बंसल (Piyush Bansal) ने स्पष्टीकरण दिया है और कहा कि वायरल हो रहा दस्तावेज पुराना है और लेंसकार्ट की मौजूदा नीति को नहीं दर्शाता है लेकिन उनकी यह सफाई लोगों के गले नहीं उतर रही है।
Hi, all. I’ve been seeing an inaccurate policy document going viral about Lenskart.
— Peyush Bansal (@peyushbansal) April 15, 2026
I want to speak directly that this document does not reflect our present guidelines.
Our policy has no restrictions on any form of religious expression, including bindi and tilak, and we…
क्या है मामला
पूरा मामला तब शुरू हुआ जब ‘लेंसकार्ट स्टाफ यूनिफॉर्म एंड ग्रूमिंग गाइड’ नामक एक दस्तावेज इंटरनेट पर लीक हो गया। इस गाइडलाइन में स्टोर कर्मचारियों के लिए ड्रेस कोड को लेकर कुछ सख्त निर्देश दिए गए थे। इसके अनुसार, कंपनी ने महिला कर्मचारियों को स्टोर में शिफ्ट के दौरान हिजाब पहनने की और सिख कर्मचारियों को काली पगड़ी पहनने की इजाजत दी गई है लेकिन हिंदू धर्म में आस्था के प्रतीक बिंदी और तिलक पर बैन लगाया गया है। डॉक्यूमेंट में लिखा है, “धार्मिक टिक्का/तिलक और बिंदी/स्टिकर की अनुमति नहीं है।” जैसे ही यह जानकारी सार्वजनिक हुई, सोशल मीडिया यूजर्स ने इसे सीधे तौर पर हिंदू विरोधी और धार्मिक भेदभाव करार दिया।
क्या कहा पीयूष बंसल ने
इसके बाद पीयूष बंसल ने सोशल मीडिया पर सफाई देते हुए इन आरोपों को खारिज किया और कहा लिखा, “नमस्ते सभी को, मैं लेंसकार्ट से जुड़ा एक गलत पॉलिसी दस्तावेज़ वायरल होते देख रहा हूं। यह हमारी वर्तमान नीति को नहीं दर्शाता। हमारे कर्मचारियों को बिंदी या तिलक पहनने की पूरी स्वतंत्रता है। हमारी ग्रूमिंग पॉलिसी समय के साथ विकसित हुई है और पुराने संस्करण आज हमारी पहचान को नहीं दर्शाते। इस भ्रम के लिए हम क्षमा चाहते हैं।”
स्पष्टीकरण से संतुष्ट नहीं लोग
हालांकि कुछ यूजर्स ने पीयूष बंसल की सफाई पर सवाल उठाए हैं। कुछ यूजर्स ने उनके ‘पुराने दस्तावेज’ वाले दावे को झूठा करार देते हुए स्क्रीनशॉट साझा करते हुए दावा किया कि जो दस्तावेज वायरल हो रहा है, वह फरवरी 2026 का है यानी यह महज दो महीने पुराना है। इंटरनेट पर लोग पूछ रहे हैं कि अगर यह फरवरी 2026 की पॉलिसी है, तो इसे ‘पुराना’ कैसे कहा जा सकता है?

