UPI पर MDR लगाने का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, केंद्र-RBI समेत सभी पक्षों को नोटिस
punjabkesari.in Monday, Sep 28, 2026 - 01:17 PM (IST)
नई दिल्लीः UPI के जरिए 2,000 रुपए से अधिक के चुनिंदा कारोबारी भुगतानों पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। अदालत ने इस मामले में केंद्र सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), NPCI समेत अन्य संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। सभी पक्षों से चार सप्ताह के भीतर जवाब मांगा गया है।
इस मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ कर रही है। पीठ में जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना भी शामिल हैं।
वित्त मंत्रालय की अधिसूचनाओं को चुनौती
याचिका में वित्त मंत्रालय की 14 और 15 सितंबर की अधिसूचनाओं को चुनौती दी गई है। याचिकाकर्ता ने 2,000 रुपए से अधिक के चुनिंदा P2M यानी Person-to-Merchant UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लगाने के फैसले को रद्द करने की मांग की है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत सामान्य P2M ट्रांजैक्शन पर अधिकतम 0.4 फीसदी MDR का प्रावधान किया गया है। यह व्यवस्था 15 अक्टूबर 2026 से लागू होनी है।
याचिकाकर्ता ने उठाए कानूनी आधार पर सवाल
सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता की ओर से कहा गया कि UPI के विस्तार के बाद ब्लैक मनी से जुड़े लेनदेन में कमी आई है। याचिका में नई MDR व्यवस्था के कानूनी आधार पर भी सवाल उठाए गए हैं। याचिकाकर्ता का तर्क है कि 2,000 रुपए से अधिक के कुछ UPI भुगतानों पर शुल्क लगाने का फैसला पर्याप्त वैधानिक आधार, पारदर्शिता और सार्वजनिक परामर्श के बिना लिया गया।
केंद्र का दावा- 96% मर्चेंट ट्रांजैक्शन प्रभावित नहीं होंगे
केंद्र सरकार की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) आर. वेंकटरमणी ने अदालत को बताया कि नई व्यवस्था की पहली बड़ी समयसीमा 15 अक्टूबर है। उनके मुताबिक, UPI के करीब 96 फीसदी मर्चेंट ट्रांजैक्शन इस व्यवस्था से प्रभावित नहीं होंगे।
सरकार के अनुसार, 2,000 रुपए तक के P2M भुगतान और तय श्रेणी के छोटे कारोबारियों के लिए जीरो-MDR व्यवस्था जारी रहेगी।
कोर्ट ने पूछा- चार्ज की कानूनी प्रकृति क्या है?
सुनवाई के दौरान जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने सवाल किया कि यदि MDR को सरकारी फीस या शुल्क नहीं माना जा रहा है, तो इसकी कानूनी प्रकृति क्या है। उन्होंने यह भी पूछा कि कार्यपालिका के पास इस तरह का चार्ज तय करने का अधिकार किस सीमा तक है। अदालत ने केंद्र से व्यवस्था के कानूनी और तकनीकी पहलुओं को स्पष्ट करने को कहा है।
सरकार बोली- MDR से केंद्र को कोई पैसा नहीं मिलेगा
ASG आर. वेंकटरमणी ने कहा कि डेबिट और क्रेडिट कार्ड से भुगतान की तरह UPI लेनदेन में भी लागत आती है। उन्होंने स्पष्ट किया कि MDR सरकार की ओर से की जाने वाली वसूली नहीं है। सरकार के मुताबिक, यह पेमेंट सिस्टम से जुड़े पक्षों के बीच सेटलमेंट से संबंधित शुल्क है, जिसे NPCI की व्यवस्था के तहत लागू किया जाएगा। केंद्र ने कहा कि MDR से सरकार को कोई राशि नहीं मिलेगी।
