Why Share Market Crash: बाजार में हड़कंप...निवेशकों के 2.94 लाख करोड़ स्वाहा, आईटी-ऑटो शेयरों में बिकवाली

punjabkesari.in Tuesday, Feb 24, 2026 - 03:32 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में तेज गिरावट दर्ज की गई। आईटी और ऑटो सेक्टर में भारी बिकवाली के चलते प्रमुख सूचकांक दबाव में आ गए। BSE Sensex 1068.74 अंक लुढ़क कर 82,225.92 पर आ गया। वहीं Nifty भी 288.35 अंक टूटकर 25,424.65 पर बंद हुआ।

कारोबार के दौरान सेंसेक्स करीब 1300 अंक गिरा जबकि निफ्टी में 351 अंक की गिरावट रही। इस गिरावट से निवेशकों की करीब 2.94 लाख करोड़ रुपए की पूंजी घट गई और बीएसई पर कुल मार्केट कैप घटकर लगभग 466 लाख करोड़ रुपए रह गया।
 

बाजार में गिरावट के 5 प्रमुख कारण


1. आईटी शेयरों में तेज बिकवाली

आईटी सेक्टर में बड़ी गिरावट ने बाजार की चाल बिगाड़ दी।

  • TCS
  • Infosys
  • HCL Technologies

इन कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली देखने को मिली। इसकी एक वजह एआई कंपनी Anthropic द्वारा अपने ‘Claude Code’ टूल को लेकर दिया गया बयान रहा, जिसमें कहा गया कि यह टूल पुराने COBOL सिस्टम को आधुनिक बनाने में सक्षम है। इससे पारंपरिक आईटी सेवाओं की मांग को लेकर आशंकाएं बढ़ीं।

2. ट्रंप की टैरिफ चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति Donald Trump ने हाल में व्यापार नीति को लेकर सख्त रुख अपनाया है। उन्होंने संकेत दिया कि जरूरत पड़ने पर 15% तक का वैश्विक टैरिफ लगाया जा सकता है। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के हालिया फैसले के बाद आई इस टिप्पणी ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी, जिसका असर भारत पर भी पड़ा।

3. वैश्विक बाजारों में कमजोरी

एशियाई बाजारों में भी गिरावट का माहौल रहा। अमेरिका में पिछले सत्र में S&P 500 करीब 1% गिरा, Nasdaq Composite में 1.1% की गिरावट आई। वॉल स्ट्रीट की कमजोरी और भू-राजनीतिक तनावों ने निवेशकों की चिंता बढ़ाई।

4. साप्ताहिक एक्सपायरी का दबाव

निफ्टी डेरिवेटिव्स की साप्ताहिक एक्सपायरी के चलते बाजार में उतार-चढ़ाव बढ़ गया। इस दौरान ट्रेडर्स अपनी पोजीशन स्क्वायर ऑफ या रोलओवर करते हैं, जिससे इंडेक्स में तेज हलचल देखने को मिलती है। लॉन्ग पोजीशन कटने और हेजिंग गतिविधियों ने बिकवाली को और तेज किया।

5. रुपए में कमजोरी

भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले 0.07% गिरकर 90.95 पर आ गया। कमजोर रुपये से विदेशी निवेशकों की धारणा प्रभावित हो सकती है। साथ ही, आयात लागत—विशेषकर कच्चे तेल—महंगी होने की आशंका से बाजार पर अतिरिक्त दबाव बना।
  


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Content Writer

jyoti choudhary

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