शेयर बाजार में FPI की बिकवाली तेज, 2026 में विदेशी निवेशकों ने निकाले ₹1.08 लाख करोड़ से ज्यादा

punjabkesari.in Thursday, Apr 30, 2026 - 04:18 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः भारतीय शेयर बाजार के लिए 2026 चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) ने अब तक 1.08 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की निकासी कर ली है, जो पूरे 2025 की कुल निकासी से भी अधिक है। यह आंकड़ा निवेशकों के घटते भरोसे को साफ दर्शाता है।

रिपोर्ट के मुताबिक रुपए की कमजोरी, कच्चे तेल की ऊंची कीमतें और आर्टिफिशियल इंटैलिजैंस (AI) सैक्टर में सीमित निवेश अवसरों ने विदेशी निवेशकों को सतर्क कर दिया है। इन कारकों के चलते उन्होंने जोखिम कम करने की रणनीति अपनाई है। एशियाई और उभरते बाजारों में भारत से निकासी का स्तर काफी ऊंचा रहा है। दक्षिण कोरिया के बाद भारत दूसरा सबसे ज्यादा बिकवाली वाला बाजार बना हुआ है। यह 2026 के पहले चार महीनों में अब तक की सबसे बड़ी निकासी मानी जा रही है।

2024 से जारी है गिरावट का ट्रैंड

विदेशी निवेशकों की यह दूरी नई नहीं है। सितंबर 2024 से ही FPI का रुख कमजोर पड़ने लगा था। कंपनियों की कमाई की तुलना में शेयर बाजार के ऊंचे वैल्यूएशन ने निवेशकों को चिंतित किया। 2025 में भी 1.6 लाख करोड़ रुपए की रिकॉर्ड निकासी दर्ज की गई थी। मार्च 2026 में यह बिकवाली सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही। AI से जुड़े वैश्विक बाजार जैसे ताइवान और दक्षिण कोरिया में भी निवेशकों ने पैसा निकाला। 

ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार दक्षिण कोरिया में 35.3 अरब डॉलर, भारत में 19.75 अरब डॉलर और ताइवान में 8.5 अरब डॉलर की निकासी हुई।

कहां जा रहा है पैसा

जहां भारत और एशियाई बाजारों से पैसा निकल रहा है, वहीं रूस और ब्राजील जैसे बाजारों में विदेशी निवेश बढ़ा है। इन देशों में क्रमशः 20.6 अरब डॉलर और 11.8 अरब डॉलर का निवेश आया है। हालांकि विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बावजूद घरेलू संस्थागत निवेशकों (डी.आई.आई.) ने बाजार को सहारा दिया है। 

29 अप्रैल को जहां एफ.पी.आई. ने करीब 2,468करोड़ रुपए के शेयर बेचे, वहीं डी.आई.आई. ने लगभग 2,262 करोड़ रुपए की खरीदारी की।

निवेशकों के लिए क्या है रणनीति

विशेषज्ञों का मानना है कि इस उतार-चढ़ाव के बीच निवेशकों को मजबूत कंपनियों पर ध्यान देना चाहिए। खासकर वे कंपनियां जो चौथी तिमाही (क्यू-4) में उम्मीद से बेहतर नतीजे दे रही हैं और आगे के लिए सकारात्मक संकेत दे रही हैं, उनमें निवेश के मौके बन सकते हैं। 

विदेशी निवेशकों की लगातार निकासी भारतीय बाजार के लिए चिंता का संकेत है, लेकिन घरेलू निवेशकों का समर्थन और मजबूत कंपनियों के प्रदर्शन से बाजार में स्थिरता बनी रह सकती है। ऐसे में समझदारी से निवेश करना ही सबसे बड़ा हथियार साबित होगा।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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