Crude Oil Prices: मई के बाद पहली बार $110 के पार पहुंचा ब्रेंट क्रूड, भारत में महंगा हो सकता है पेट्रोल-डीजल!

punjabkesari.in Saturday, Oct 17, 2026 - 12:41 PM (IST)

नई दिल्लीः अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में एक बार फिर तेज उछाल देखने को मिला है। ब्रेंट क्रूड का भाव मई के बाद पहली बार 110 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया, जबकि अमेरिकी क्रूड की कीमतों में भी करीब 4 फीसदी की तेजी दर्ज की गई। तेल की सप्लाई में जल्द राहत मिलने की उम्मीद कमजोर पड़ने और कई क्षेत्रों में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने ऊर्जा बाजार की चिंता बढ़ा दी है।

हूती विद्रोहियों के सऊदी अरब के तेल ठिकानों पर हमलों और रूस-यूक्रेन के बीच ऊर्जा संयंत्रों तथा रिफाइनरियों को निशाना बनाए जाने से वैश्विक तेल आपूर्ति प्रभावित होने की आशंका है। इससे अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है।

क्यों बढ़ रहे हैं कच्चे तेल के दाम?

कच्चे तेल की कीमतों में तेजी के पीछे सबसे बड़ी वजह सप्लाई को लेकर बढ़ती चिंताएं हैं। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों के हमलों से सऊदी अरब के ऊर्जा ठिकानों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ी है। वहीं, रूस और यूक्रेन के बीच जारी हमलों से तेल उत्पादन, रिफाइनिंग और परिवहन व्यवस्था प्रभावित होने का खतरा बना हुआ है।

इसके अलावा, रूस से डीजल की आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता ने भी बाजार की चिंता बढ़ाई है। अमेरिकी सांसदों की ओर से रूस से जुड़े प्रस्तावित समझौते को रोकने की पहल और रूसी रिफाइनरियों पर हमलों के कारण आपूर्ति सामान्य होने की उम्मीदों को झटका लगा है।

रूसी रिफाइनरी पर हमले से बढ़ी चिंता

एक रिपोर्ट के मुताबिक, रूस की रियाजान तेल रिफाइनरी पर हुए हमले के बाद वहां परिचालन रोकना पड़ा। इस घटनाक्रम ने रूस से डीजल की संभावित आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बढ़ा दी है।

काला सागर क्षेत्र में तनाव और ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमलों के कारण बाजार में यह आशंका बनी हुई है कि वैश्विक तेल और ईंधन आपूर्ति पर दबाव लंबे समय तक जारी रह सकता है।

क्या भारत में महंगा होगा पेट्रोल-डीजल?

अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊंची बनी रहती हैं, तो भारत में पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर भी दबाव बढ़ सकता है। तेल महंगा होने से सरकारी तेल विपणन कंपनियों की लागत बढ़ती है और उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

हालांकि, घरेलू पेट्रोल-डीजल की कीमतें केवल अंतरराष्ट्रीय क्रूड के भाव पर निर्भर नहीं करतीं। रुपए और डॉलर की विनिमय दर, टैक्स, रिफाइनिंग लागत और तेल कंपनियों के फैसले भी अहम भूमिका निभाते हैं। इसलिए कच्चे तेल में तेजी का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल-डीजल की कीमतें तुरंत बढ़ जाएंगी।

 


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Content Writer

jyoti choudhary

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