NSE IPO को लेकर निवेशकों के लिए बड़ी खबर, सेबी और सरकार से मिली बड़ी मंजूरी
punjabkesari.in Thursday, Jan 15, 2026 - 05:40 PM (IST)
नई दिल्लीः नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के आईपीओ को लेकर निवेशकों के लिए बड़ी खबर सामने आई है। सेबी चेयरमैन तुहिन कांता पांडे ने गुरुवार को बताया कि रेगुलेटर ने NSE के अनफेयर मार्केट एक्सेस से जुड़े सेटलमेंट एप्लीकेशन पर सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। इसके साथ ही सरकार ने भी NSE में 2.5 फीसदी हिस्सेदारी घटाने (स्टेक डायल्यूशन) को हरी झंडी दे दी है, जिसकी अधिसूचना जल्द जारी हो सकती है। इन दोनों फैसलों से NSE की लिस्टिंग का रास्ता काफी हद तक साफ हो गया है।
NSE देश का सबसे बड़ा स्टॉक एक्सचेंज होने के साथ-साथ दुनिया के सबसे एक्टिव डेरिवेटिव्स एक्सचेंजों में शामिल है। कंपनी वर्ष 2016 से आईपीओ लाने की तैयारी कर रही थी लेकिन कानूनी और नियामकीय अड़चनों के चलते यह प्रक्रिया अटकी रही। अब सेबी से नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) मिलने का रास्ता खुलने के बाद NSE ड्राफ्ट रेड हेरिंग प्रॉस्पेक्टस (DRHP) दाखिल कर सकेगा। अगर सब कुछ तय समय पर रहा, तो 2026 के अंत या 2027 की शुरुआत में NSE की लिस्टिंग संभव मानी जा रही है।
क्यों अटका रहा NSE का IPO?
दरअसल, NSE पर को-लोकेशन, डार्क फाइबर और ट्रेडिंग एक्सेस पॉइंट (TAP) से जुड़े पुराने मामलों की जांच लंबे समय से चल रही थी। आरोप थे कि 2010 से 2014 के बीच कुछ हाई-फ्रीक्वेंसी ट्रेडर्स और ब्रोकर्स को दूसरों के मुकाबले तेज और पहले मार्केट एक्सेस मिला, जिससे उन्हें अनुचित फायदा हुआ।
इन मामलों को गंभीर मानते हुए सेबी ने 2019 में NSE पर करीब 1,100 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था और पूर्व शीर्ष अधिकारियों पर कार्रवाई की थी। मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंचा, जिससे आईपीओ की प्रक्रिया और लंबी हो गई। बाद में NSE ने विवाद सुलझाने के लिए सेटलमेंट का रास्ता अपनाया। 2024 में TAP केस में 643 करोड़ रुपये का सेटलमेंट हुआ, जबकि 2025 में को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों के लिए करीब 1,388 करोड़ रुपये का प्रस्ताव दिया गया।
अब बाधाएं लगभग खत्म
सेबी की सैद्धांतिक मंजूरी और सरकार की अनुमति के बाद NSE के आईपीओ से जुड़ी सबसे बड़ी अड़चनें लगभग दूर होती नजर आ रही हैं। औपचारिक प्रक्रियाएं पूरी होते ही NSE की लिस्टिंग भारतीय पूंजी बाजार के लिए एक ऐतिहासिक कदम साबित हो सकती है। इससे निवेशकों को देश के सबसे बड़े एक्सचेंज में हिस्सेदारी का मौका मिलेगा और बाजार की पारदर्शिता व गहराई दोनों मजबूत होंगी।
