म्यूचुअल फंड नियमों में बड़ा बदलाव, जानिए निवेशकों पर क्या असर
punjabkesari.in Thursday, Feb 26, 2026 - 04:06 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः बाजार नियामक ने म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के लिए नए और कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं, जिनका उद्देश्य निवेशकों के हितों की सुरक्षा और स्कीम्स में पारदर्शिता बढ़ाना है। नए नियमों के तहत अब फंड हाउस को अपनी स्कीम्स को उनके घोषित उद्देश्य और कैटेगरी के अनुरूप ही निवेश करना होगा, ताकि एक जैसी रणनीति वाली कई स्कीम्स के जरिए डुप्लीकेशन न हो।
नए ढांचे में म्यूचुअल फंड कैटेगरी की संख्या बढ़ाकर 40 कर दी गई है। इनमें इक्विटी, डेट, हाइब्रिड और अन्य श्रेणियां शामिल हैं। इसके अलावा एक नई लाइफ साइकिल कैटेगरी भी जोड़ी गई है, जो निवेशकों की उम्र और जोखिम प्रोफाइल के अनुसार एसेट एलोकेशन बदलेगी।
पोर्टफोलियो ओवरलैप को लेकर भी सख्त सीमा तय की गई है। अब एक ही एसेट मैनेजमेंट कंपनी (AMC) की अलग-अलग स्कीम्स के पोर्टफोलियो में तय सीमा से ज्यादा समानता नहीं हो सकेगी। खासतौर पर सेक्टोरल, थीमैटिक, वैल्यू और कॉन्ट्रा फंड्स के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश दिए गए हैं। ओवरलैप की गणना तिमाही आधार पर की जाएगी और इसका औसत डेली पोर्टफोलियो डेटा के आधार पर निकाला जाएगा।
एसेट मैनेजर्स को अब अपनी वेबसाइट पर हर महीने कैटेगरी के अनुसार पोर्टफोलियो ओवरलैप का खुलासा करना होगा। स्कीम का नाम भी उसकी निवेश रणनीति और कैटेगरी से मेल खाना जरूरी होगा। इसके अलावा कुछ पुरानी सॉल्यूशन-ओरिएंटेड स्कीम्स को बंद करने या समान स्कीम्स में विलय करने का निर्देश दिया गया है। डिविडेंड यील्ड, वैल्यू और कॉन्ट्रा फंड्स के लिए न्यूनतम 80% इक्विटी निवेश अनिवार्य किया गया है।
नए नियमों को लागू करने के लिए थीमैटिक फंड्स को तीन साल और अन्य स्कीम्स को छह महीने का समय दिया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इन बदलावों से निवेशकों को अधिक स्पष्टता मिलेगी और फंड चयन आसान होगा।
