ED summons Anil Ambani: अनिल अंबानी की बढ़ी मुश्किलें, 14 नवंबर को पेशी का ED ने भेजा समन
punjabkesari.in Thursday, Nov 06, 2025 - 03:10 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः रिलायंस ग्रुप के चेयरमैन अनिल अंबानी की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ गई हैं। बैंक लोन फर्जीवाड़ा मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने उन्हें दोबारा पूछताछ के लिए समन भेजा है। ईडी ने 66 वर्षीय उद्योगपति को 14 नवंबर को पेश होने का निर्देश दिया है। इस पूछताछ का संबंध एसबीआई बैंक लोन फर्जीवाड़ा और मनी लॉन्ड्रिंग आरोपों से है। इससे पहले भी ईडी ने 5 अगस्त को उनसे पूछताछ की थी।
ईडी इस समय रिलायंस पावर से जुड़े फर्जी बैंक गारंटी रैकेट की जांच कर रही है। जांच में सामने आया है कि सरकारी संस्था Solar Energy Corporation of India (SECI) के लिए टेंडर प्रक्रिया के दौरान रिलायंस पावर को बैंक गारंटी जमा करनी थी। इसके लिए कंपनी ने ओडिशा की Biswal Tradelink Pvt Ltd (BTPL) नाम की कंपनी को यह काम सौंपा। लेकिन जांच में पाया गया कि BTPL द्वारा दी गई बैंक गारंटी नकली थी। रिलायंस पावर ने इस गारंटी के बदले BTPL को लगभग 5.4 करोड़ रुपए दिए थे।
इस फर्जीवाड़े को अंजाम देने के लिए SBI की असली वेबसाइट (sbi.co.in) की नकल करते हुए एक नकली वेबसाइट (s-bi.co.in) बनाई गई और फर्जी ईमेल भेजकर दस्तावेजों को असली दिखाने की कोशिश की गई। ईडी ने अब BTPL के मैनेजिंग डायरेक्टर पार्थ सारथी बिस्वाल को गिरफ्तार कर लिया है। जांच में यह भी पता चला है कि यह कंपनी सिर्फ कागजों में मौजूद थी, जिसका न कोई वास्तविक दफ्तर था और न ही सही दस्तावेज। कंपनी के कई बैंक खातों में करोड़ों रुपये के संदिग्ध लेनदेन सामने आए हैं। रैकेट से जुड़े लोग चैट डिलीट होने वाले मैसेज ऐप्स का इस्तेमाल करते थे, ताकि सबूत मिटाए जा सकें।
जांच में आगे यह भी खुलासा हुआ है कि अनिल अंबानी समूह की अन्य कंपनियों, Reliance NU BESS Limited और Maharashtra Energy Generation Ltd, द्वारा भी SECI को 68.2 करोड़ रुपए की फर्जी बैंक गारंटी जमा कराई गई थी। इसके बाद ईडी ने रिलायंस ग्रुप से जुड़े पुराने वित्तीय मामलों की भी दोबारा जांच शुरू कर दी है। जिसमें Reliance Communications (RCom) पर 14,000 करोड़ रुपए के लोन फ्रॉड और Canara Bank से 1,050 करोड़ रुपए की धोखाधड़ी जैसे आरोप शामिल हैं। संसद में सरकार पहले ही बता चुकी है कि SBI ने RCom को फ्रॉड अकाउंट घोषित किया है।
कुल मिलाकर यह मामला सिर्फ एक नकली बैंक गारंटी का नहीं है, बल्कि रिलायंस ग्रुप की वित्तीय पारदर्शिता और प्रबंधन प्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े करता है। अब ईडी की अगली पूछताछ यह साफ कर सकती है कि इस पूरी प्रक्रिया में अनिल अंबानी की भूमिका क्या रही और उन्हें इस फर्जीवाड़े की कितनी जानकारी थी।
