Moody-Fitch Warned: ईरान संकट से बढ़ सकती है तेल कंपनियों की मुश्किलें, कमाई और कैश फ्लो पर दबाव की चेतावनी

punjabkesari.in Wednesday, Mar 11, 2026 - 04:28 PM (IST)

बिजनेस डेस्कः वैश्विक ऊर्जा बाजार में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव का असर अब भारत की सरकारी तेल कंपनियों पर भी दिखने लगा है। रेटिंग एजेंसियों Moody's Ratings और Fitch Ratings ने चेतावनी दी है कि अगर पश्चिम एशिया का संकट लंबा चलता है तो भारतीय तेल और गैस कंपनियों की कमाई और नकदी प्रवाह पर दबाव बढ़ सकता है।

मूडीज की रिपोर्ट

मूडीज की रिपोर्ट के अनुसार Indian Oil Corporation, Bharat Petroleum Corporation Limited और Hindustan Petroleum Corporation Limited जैसी सरकारी तेल विपणन कंपनियों की आय में उतार-चढ़ाव बढ़ सकता है। इसकी वजह यह है कि अप्रैल 2022 से पेट्रोल-डीजल के खुदरा दाम लगभग स्थिर हैं, जबकि वैश्विक बाजार में तेल और गैस की कीमतों में लगातार बदलाव हो रहा है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय कीमतें बढ़ने पर इन कंपनियों को बढ़ी हुई लागत का बड़ा हिस्सा खुद ही उठाना पड़ता है, जिससे उनका विपणन मार्जिन और नकदी प्रवाह प्रभावित हो सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक देश के करीब 90 प्रतिशत पेट्रोल पंप इन्हीं तीन कंपनियों के नियंत्रण में हैं, इसलिए ईंधन कीमतों को स्थिर रखने की जिम्मेदारी भी इन्हीं पर ज्यादा रहती है। हाल ही में वैश्विक तेल मानक ब्रेंट क्रूड 119 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया था, हालांकि बाद में यह गिरकर 90 डॉलर प्रति बैरल के आसपास आ गया। इसके बावजूद घरेलू बाजार में पेट्रोल-डीजल की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया।

क्या कहा फिच ने

दूसरी ओर Fitch Ratings ने कहा है कि अगर ईरान से जुड़ा तनाव लंबा खिंचता है और Strait of Hormuz में आवागमन प्रभावित होता है, तो भारतीय तेल विपणन कंपनियों के साथ-साथ GAIL (India) Limited के नकदी प्रवाह पर भी असर पड़ सकता है। हालांकि एजेंसी का कहना है कि सरकारी समर्थन के कारण इन कंपनियों की क्रेडिट रेटिंग पर तत्काल कोई खतरा नहीं है।

फिच के अनुसार तेल कंपनियों में BPCL की वित्तीय स्थिति सबसे मजबूत मानी जा रही है, जो लंबे समय तक आपूर्ति बाधित होने या कच्चे तेल की कीमतें बढ़ने की स्थिति को बेहतर तरीके से संभाल सकती है। इसके बाद IOC और HPCL का स्थान आता है।

रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि भारत अपनी प्राकृतिक गैस की लगभग आधी जरूरत आयात से पूरी करता है और आयातित एलएनजी का करीब 60 प्रतिशत हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है। ऐसे में यदि क्षेत्र में आपूर्ति बाधित होती है तो GAIL के गैस ट्रांसमिशन और मार्केटिंग कारोबार पर भी असर पड़ सकता है। वहीं निजी रिफाइनरी कंपनियों जैसे Reliance Industries पर इसका असर मिला-जुला हो सकता है—क्योंकि शुरुआती दौर में ऊंची कीमतों से रिफाइनिंग मार्जिन बढ़ सकता है, लेकिन लंबी अवधि में आपूर्ति बाधित होने का जोखिम भी बढ़ जाएगा।

कुल मिलाकर, विशेषज्ञों का मानना है कि अगर पश्चिम एशिया का संकट लंबा चलता है तो भारत की तेल और गैस कंपनियों की वित्तीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है, हालांकि सरकारी समर्थन से स्थिति को संभालने की कोशिश की जा सकती है।
 


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Content Writer

jyoti choudhary

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