ईरान-इजरायल युद्ध के बीच Anil Agarwal का छलका दर्द, दूसरों की लड़ाई की कीमत क्यों चुकाए भारत?
punjabkesari.in Thursday, Mar 12, 2026 - 06:33 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः ईरान और इजरायल के बीच जारी युद्ध के कारण वैश्विक ऊर्जा बाजार में उथल-पुथल मची हुई है। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से कई देशों की तरह भारत पर भी इसका असर देखने को मिल रहा है। इस बीच वेदांता ग्रुप के चेयरमैन Anil Agarwal का दर्द इस युद्ध पर छलका है। उन्होंने लिखा कि जिस युद्ध से हमारा कोई लेना-देना नहीं है, उसकी कीमत भारत को चुकाना पड़ रहा है।
सोशल मीडिया पर जताई चिंता
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर एक पोस्ट में अनिल अग्रवाल ने कई मसलों को उठाया है। वह लिखते हैं "यह देखकर दिल दुखता है कि एक ऐसी War, जिससे हमारा कोई लेना-देना नहीं है, उसकी कीमत भारत को कच्चे माल की कमी के रूप में चुकानी पड़ रही है लेकिन सच यह है कि हमें यह कीमत चुकाने की ज़रूरत ही नहीं है। आखिर हम 90% Oil बाहर से क्यों मंगाएं? 95% Copper, 99.5% Gold, इतना Import हमें क्यों करना पड़ता है? जब धरती मां ने हमें अपने देश में ही सब कुछ दिया है।"
उद्योगों को अधिक स्वतंत्रता की जरूरत
अग्रवाल का मानना है कि अगर खनन और प्राकृतिक संसाधन क्षेत्रों में उद्योगपतियों को अधिक स्वतंत्रता दी जाए तो आयात पर निर्भरता काफी कम की जा सकती है। उन्होंने कहा कि चार दशक के अनुभव के आधार पर वह यह विश्वास से कह सकते हैं कि भारत की भूगर्भीय क्षमता दुनिया में सबसे बेहतर में से एक है और अब समय आ गया है कि इस क्षमता का पूरा उपयोग किया जाए।
निवेश और तकनीक से बदली तस्वीर
उन्होंने अपने अनुभव का जिक्र करते हुए बताया कि जब उन्होंने इस क्षेत्र में काम शुरू किया था तब न पर्याप्त तकनीक थी, न विशेषज्ञ और न ही वित्तीय संसाधन। इसके बावजूद कंपनी ने विदेशों से लगभग 35 अरब डॉलर जुटाकर भारत में निवेश किया और आधुनिक तकनीक तथा विशेषज्ञों की मदद से कई क्षेत्रों में उत्पादन शुरू किया।
आज Hindustan Zinc जैसे उपक्रम जिंक के साथ-साथ सिल्वर और उर्वरक का भी उत्पादन कर रहे हैं और भविष्य में क्रिटिकल मिनरल्स के उत्पादन की दिशा में काम चल रहा है।
कठिन समय में मिला हौसला
अग्रवाल ने यह भी बताया कि इस साल उनके परिवार पर एक बड़ी व्यक्तिगत त्रासदी आई थी। ऐसे समय में Narendra Modi के संदेश से उन्हें काफी हौसला मिला। प्रधानमंत्री ने उन्हें मजबूत बने रहने और भारत के लिए महत्वपूर्ण काम जारी रखने की सलाह दी थी।
