Gold-Silver के बाद अब ये धातु मचाएगी धमाल! 2026 में जबरदस्त तेजी के संकेत
punjabkesari.in Saturday, Jan 03, 2026 - 04:45 PM (IST)
बिजनेस डेस्कः 2025 में सोना और चांदी की जबरदस्त रैली के बाद अब इंडस्ट्रियल मेटल्स में भी तेज उछाल देखने को मिल रहा है। तांबा (Copper) और एल्युमिनियम (Aluminium) की कीमतें लगातार ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं। बाजार विश्लेषकों का मानना है कि साल 2026 में इन धातुओं में “मॉन्स्टर रैली” देखने को मिल सकती है, जिसका सीधा असर आम उपभोक्ताओं की जेब पर पड़ेगा।
एल्युमिनियम तीन साल के उच्चतम स्तर पर
एल्युमिनियम की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार में USD 3,000 प्रति टन के पार पहुंच गई हैं, जो तीन साल से अधिक का उच्चतम स्तर है। इस तेजी के पीछे कई अहम कारण हैं—
- चीन में स्मेल्टिंग क्षमता पर सख्त सीमाएं
- यूरोप में बिजली की ऊंची लागत के चलते उत्पादन में कटौती
- निर्माण, रिन्यूएबल एनर्जी और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर से मजबूत दीर्घकालिक मांग
- फ्यूचर्स मार्केट में 2025 के दौरान एल्युमिनियम ने 17% की बढ़त दर्ज की, जो 2021 के बाद इसका सबसे मजबूत सालाना प्रदर्शन रहा।
तांबा बना इंडस्ट्रियल मेटल्स का सुपरस्टार
तांबा इस समय इंडस्ट्रियल मेटल्स में सबसे आगे निकल चुका है। 2009 के बाद सबसे बड़ी सालाना बढ़त दर्ज करने के बाद लंदन मेटल एक्सचेंज (LME) पर तांबे की कीमतें USD 12,000 प्रति टन के पार चली गई हैं।
इस तेजी के प्रमुख कारणों में इंडोनेशिया, चिली और कांगो जैसे बड़े उत्पादक देशों में खनन दुर्घटनाएं, चिली की एक प्रमुख खदान में यूनियन हड़ताल और सप्लाई चेन में रुकावटें शामिल हैं। इसके अलावा, ट्रेड अनिश्चितताओं के चलते अमेरिका की ओर शिपमेंट बढ़ने से भी सप्लाई पर दबाव बना है।
निकेल की सप्लाई पर भी दबाव
दुनिया के सबसे बड़े निकेल उत्पादक देश इंडोनेशिया ने उत्पादन घटाने के संकेत दिए हैं। वहीं PT Vale Indonesia की एक खदान में रेगुलेटरी मंजूरी में देरी के चलते अस्थायी ठहराव ने बाजार की चिंताएं और बढ़ा दी हैं।
कमोडिटीज की ओर निवेशकों का रुझान
एनालिस्ट्स का कहना है कि इंडस्ट्रियल मेटल्स में यह तेजी ब्याज दरों में संभावित कटौती, कमजोर अमेरिकी डॉलर और चीन की अर्थव्यवस्था में सुधार की उम्मीदों का नतीजा है। हाल ही में Goldman Sachs ने भी संकेत दिया है कि सप्लाई बाधाएं, नीतिगत बदलाव और ग्लोबल निवेश के चलते इंडस्ट्रियल मेटल्स की कीमतें ऊंची बनी रह सकती हैं और 2026 की पहली छमाही तक तांबे के भाव मजबूत रहेंगे।
घरेलू बजट पर पड़ेगा असर
इस तेजी का असर अब आम लोगों की जेब पर भी दिखने लगा है। तांबे पर निर्भर उत्पाद—जैसे एयर कंडीशनर, किचन अप्लायंसेज़, बाथ फिटिंग्स और कुकवेयर—जल्द ही महंगे हो सकते हैं। भारत में MCX पर तांबे की कीमतें हाल ही में ₹1,300 प्रति किलो के करीब पहुंच गई हैं, जो 6% से ज्यादा की तेजी दर्शाती है।
5–8% तक बढ़ सकती हैं कीमतें
इंडस्ट्री से जुड़े अधिकारियों के अनुसार, ड्यूरेबल्स और अप्लायंसेज़ कंपनियां बढ़ती कच्चे माल की लागत की भरपाई के लिए 5–8% तक कीमतें बढ़ाने की तैयारी में हैं। कंपनियों का कहना है कि मोटर जैसे अहम पुर्जों में तांबे का विकल्प संभव नहीं है, क्योंकि इससे परफॉर्मेंस और एफिशिएंसी प्रभावित हो सकती है।
बाथवेयर कंपनियां भी दबाव में हैं, क्योंकि ब्रास (तांबा आधारित धातु) की कीमतें चालू कारोबारी साल की शुरुआत से ही डबल डिजिट बढ़त दर्ज कर चुकी हैं। कई कंपनियां पहले ही कई बार कीमतें बढ़ा चुकी हैं और आगे भी बढ़ोतरी से इनकार नहीं कर रही हैं।
