विश्व में बढ़ती ‘भारत और भारतीयता’ की धमक

2020-02-21T04:42:16.067

आखिर इतिहास कैसे करवट लेता है? इसका प्रत्यक्ष और हालिया उदाहरण भारत से मीलों दूर यूनाइडेट किंगडम के राजनीतिक घटनाक्रम में मिलता है। ब्रिटेन में प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री के बाद वहां के तीसरे और चौथे सबसे शक्तिशाली व्यक्ति न केवल भारतीय मूल के हैं, बल्कि वैदिक सनातन संस्कृति का अंश होने पर गौरवान्वित भी अनुभव करते हैं। 47 वर्षीय प्रीति पटेल जहां 2019 से ब्रिटेन में गृह मंत्रालय सम्भाल रही हैं, तो वही 39 वर्षीय ऋषि सुनाक को गत दिनों ही महत्वपूर्ण वित्त मंत्रालय की जिम्मेदारी सौंपी गई है। इसके अतिरिक्त, 52 वर्षीय और आगरा में जन्मे आलोक शर्मा भी ब्रितानी प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के मंत्रिमंडल की शोभा बढ़ा रहे है। 

ब्रिटेन की प्रवासन सलाहकार समिति ने टीयर-2 श्रेणी में पेशेवरों का वेतन 30,000 पाऊंड से घटाकर 25,600 पाऊंड करने के साथ कौशल स्तर, अंग्रेजी भाषा की जानकारी और नौकरी के लिए अतिरिक्त अंक देने की सिफारिश की है। यूरोपीय संघ से अलग ब्रिटेन में गत वर्ष इसी श्रेणी में 56,241 कुशल भारतीय पेशेवरों को वीजा दिया गया था। ब्रेग्जिट के बाद माना जा रहा है कि यह संख्या और बढ़ेगी। प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन पहले ही स्पष्ट कर चुके हैं कि वे अल्प-कुशल लोगों का प्रवासन रोकना चाहते हैं और सस्ते श्रम के बदले कौशल, तकनीक और नवाचार को बढ़ावा देंगे ताकि ब्रिटेन को दीर्घकालिक लाभ मिले। 

आज ब्रिटेन में भारतीयों और भारतीय मूल के नागरिकों की स्थिति क्या है? इसका उत्तर-यूनाइटेड किंगडम के राष्ट्रीय सांख्यिकीय विभाग द्वारा 2019 में जारी एक आंकड़े में छिपा है। रिपोर्ट के अनुसार, ब्रिटेन में चीनी मूल के नागरिकों के बाद भारतीय मूल के लोग स्थानीय युवाओं की तुलना में अधिक धन अर्जित करते हैं जबकि बंगलादेशी और पाकिस्तानी मूल के कर्मचारियों की औसत कमाई सबसे कम है। जहां चीनी कर्मचारी प्रति घंटा करीब 1,350 रुपए कमाते हैं, वहीं भारतीय कर्मचारी 1152 रुपए प्राप्त करते हैं जबकि स्थानीय ब्रिटिश युवकों को करीब 1030 रुपए ही मिलते हैं। बंगलादेशी और पाकिस्तानी युवकों की हर घंटे कमाई क्रमश: करीब 821 रुपए और 855 रुपए है। 

पंजाब से अनेक लोगों ने उज्ज्वल भविष्य की खोज में यूरोपीय देशों का रुख किया
यह सब एकाएक नहीं हुआ। दूसरे विश्वयुद्ध के बाद जब संकट से घिरे इंगलैंड का पुनर्निर्माण प्रारम्भ हुआ, तब कालांतर में भारत विशेषकर पंजाब से अनेक  लोगों ने उज्ज्वल भविष्य की खोज में यूरोपीय देशों का रुख किया। बाद में उनकी अगली पीढिय़ों ने अपने परिश्रम, बौद्धिक क्षमता और पारिवारिक मूल्यों के आधार पर स्थानीय लोगों के साथ सामंजस्य स्थापित करके विदेश में सम्मानजनक स्थान प्राप्त किया। भिन्न संस्कृति, विचार और जीवनशैली से तारतम्य बनाने में अधिकांश भारतीय इसलिए भी सफल हुए या यूं कहें कि अब भी सफल हो रहे हैं क्योंकि वे वैदिक सनातन संस्कृति की जननी भारत से मीलों दूर होकर अपनी मूल जड़ों और परम्पराओं से ऊर्जा प्राप्त कर रहे हैं, जिसमें ‘‘वसुधैव कुटुम्बकम्’’’ और ‘‘एकं सद्विप्रा बहुधा वदन्ति’’ का चिंतन निहित है। 

इस बहुलतावादी दर्शन का प्रतिबिंब यूनाइडेट किंगडम के नवनिर्वाचित ‘‘चांसलर ऑफ द  एक्सचैकर’’ अर्थात् वित्तमंत्री ऋषि सुनाक की जीवनशैली और व्यवहार में भी मिलता है। ब्रिटेन में जन्मे और पंजाबी पृष्ठभूमि से आने वाले भारतवंशी ऋषि ने एक साक्षात्कार में कहा था ‘‘मैं जनगणना के समय सदैव ब्रिटिश भारतीय श्रेणी पर निशान लगाता हूं। मैं पूरी तरह से ब्रिटिश हूं, यह मेरा घर और मेरा देश है। किंतु मेरी धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत भारतीय है। मेरी पत्नी अक्षता (इंफोसिस के सह-संस्थापक नारायण मूर्ति की सुपुत्री) भी भारतीय है। मैं अपनी हिंदू पहचान पर मुखर हूं। मैं ब्रिटेन में रहते हुए भी गोमांस का सेवन नहीं करता हूं, जो मेरे लिए कभी समस्या भी नहीं बना।’’ 

अपनी हिंदू पहचान पर गर्व करने वाले ऋषि को वैदिक साहित्य से मार्गदर्शन मिलना स्वाभाविक है। यही कारण है कि गत वर्ष दिसम्बर में जब हाऊस आफ कॉमन्स (संसद) के नए सदस्य बतौर सांसद शपथ ले रहे थे, तब ऋषि के साथ ब्रितानी मंत्रिमंडल के एक और भारतीय मूल के सदस्य आलोक शर्मा ने ईसाइयों के पवित्र ग्रंथ बाइबल के बजाय भगवद् गीता की प्रति हाथ में रखकर शपथ ली थी। रिचमंड (यॉर्क) सीट से लगातार तीसरी बार सांसद निर्वाचित होने वाले ऋषि 2017 में भी भगवद् गीता को साक्षी मान कर शपथ ले चुके हैं। प्रीति पटेल की पृष्ठभूमि भी लगभग ऋषि जैसी ही है। इंगलैंड में जन्मी प्रीति के माता-पिता गुजराती मूल के थे और वह 1960 के दशक में युगांडा से इंगलैंड आकर बसे थे। 

ऋषि सुनाक का व्यक्तित्व उनके परिवार-घर के उस ‘ईको-सिस्टम’ और संस्कार से जनित है, जिसे प्राणवायु वैदिक सनातन संस्कृति और उसकी बहुलतावादी परम्पराओं से तब भी मिल रही है, जब उनका परिवार दशकों पहले अपनी पैतृक भूमि-भारत से मीलों दूर हो गया था। 1960 के दशक में ब्रिटेन जाने से पहले सुनाक का परिवार पूर्वी अफ्रीका में बसा हुआ था। इसका अर्थ यह हुआ कि भारत से दूर रहने के बाद भी सुनाक का परिवार अपनी संस्कृति और परम्पराओं से जुड़ा रहा। इस पृष्ठभूमि में भारत की स्थिति विडम्बना से भरी हुई है। यहां वामपंथियों के कुटिल षड्यंत्र ने भारतीय समाज के एक वर्ग को न केवल अपनी वास्तविक जड़ों से दूर कर दिया है, बल्कि उसके व्यवहार में अपनी मूल संस्कृति प्रति नफरत की भावना भी घोल दी है। 

विश्व के सबसे धनी व्यक्तियों में कौन भारतीय सबसे ऊपर है, इसका उत्तर है मुकेश अंबानी जिससे अधिकांश पाठक अवगत हैं। बहुराष्ट्रीय कार निर्माता जगुआर लैंड रोवर का स्वामित्व वर्ष 2008 से भारतीय उद्योगपति रतन टाटा की कम्पनी टाटा मोटर्स के पास है। विश्व में सबसे बड़ी इस्पात उत्पादक कम्पनी आर्सेलर मित्तल का संचालन लक्ष्मीनिवास मित्तल कर रहे हैं। इस प्रकार की बहुत लम्बी सूची है।-बलबीर पुंज


Pardeep

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