महिलाओं के लिए सेफ नहीं दिलवालों की दिल्ली

Monday, November 13, 2017 11:11 AM
महिलाओं के लिए सेफ नहीं दिलवालों की दिल्ली

नई दिल्ली(शाहरुख खान): 22 दिन में 1740 आपराधिक वारदात, वह भी सिर्फ महिलाओं से! साफ है कि राजधानी में महिलाएं सेफ नहीं हैं। ये हम नहीं पुलिस के आंकड़े बताते हैं। दर्ज आंकड़ों के मुताबिक राजधानी में महिलाओं से जुड़ी 79 वारदात प्रतिदिन होती हैं। ऐसे में पुलिस का महिलाओं की सुरक्षा पर किया गया दावा एक छलावा सा लगता है। दिल्ली पुलिस के ताजा आंकड़े पर गौर करें तो 15 अक्तूबर से 7 नवम्बर के बीच एक महीने में ही महिलाओं के साथ 1740 आपराधिक मामले दर्ज किए गए। घर से लेकर सड़क तक हर दिन औसतन 5 महिलाएं दुष्कर्म का शिकार हुई और 9 महिलाओं की निजता भंग करने की कोशिश की गई। वहीं इसमें से 19 महिलाओं की दहेज के लिए हत्या कर दी गई।
PunjabKesariघटनाओं को लेकर पुलिस सजग नहीं
हाल में एलजी ने बढ़ते महिला अपराधों पर नाराजगी जताते हुए इसके लिए विशेष रणनीति बनाने के आदेश कमिश्नर अमूल्य पटनायक को दिए थे। इसी के चलते कमिश्नर ने सभी डीसीपी सहित थाना एसएचओ को निर्देशित किया था कि वे इस पर लगाम कसें और सभी थानाध्यक्ष सभी एनजीओ, जो महिलाओं के लिए काम करती हैं उनके साथ मिलकर काम करें। अधिक संवेदनशील व ऐसी घटनाएं घटित होने वाले क्षेत्रों में उन्होंने गश्त भी बढ़ाने के निर्देश दिए थे। दिल्ली पुलिस के ताजा आंकड़े देखने के बाद तो यही लगता है कि उपराज्यपाल के सख्त निर्देश के बावजूद विभिन्न जिलों में महिला अपराध की घटनाओं को लेकर पुलिस सजग नहीं है।

पुलिस द्वारा चलाए गए अभियान
वर्ष 2012 में वसंत विहार स्थित हुए सामूहिक दुष्कर्म मामले के बाद पुलिस ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए हिम्मत एप से लेकर कई एप लांच किए। ऑपरेशन निर्भीक, ऑपरेशन शिष्टाचार, ऑपरेशन भरोसा, जनसंपर्क, पहचान और आप का अपडेट जैसे तमाम अभियान चलाए गए। दिल्ली पुलिस ने पांच महिला पीसीआर वैन लांच की, ताकि महिला पुलिसकर्मियों को पीड़ित महिलाएं अपनी शिकायत आसानी से बता सकें। इन पीसीआर वैन में प्रशिक्षित महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया गया। इसके बावजूद भी अपराध की वारदातों में कमी नहीं आ रही है। 

अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी
अब सवाल ये उठता है कि जहां देश प्रगति की राह पर चल रहा है वहां महिलाओं की हालत बद से बत्तर हो रही है। उनकी स्थिति में कोई सुधार नहीं है। पहले उन्हें घर की सामग्री समझा जाता था और अब उन्हें अपने मनोरंजन के लिए खेलकर फेंक देने वाला खिलौना। महिलाओं को सबसे पहले अपनी सुरक्षा खुद करनी होगी। सिर्फ कानूनों से महिलाओं पर बढ़ रहे अपराधों पर लगाम नहीं लगाया जा सकता है बल्कि लोगों की सोच और मानसिक चिंता धारा में बदलाव अति आवश्यक है। लोगों के नजरिए में बदलाव जरूरी है। इसके लिए सिर्फ सरकार को ही नहीं बल्कि बुद्धिजीवियों के साथ-साथ समाज के वरिष्ठ नागरिकों को भी आगे आना होगा। 

इन जगहों पर करें शिकायत
क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल के अलावा 100 नंबर या महिला हेल्पलाइन नंबर 1091 पर कभी भी (सातों दिन चौबीसों घंटे) कॉल कर या अपने इलाके के थाने में शिकायत की जा सकती है। दिल्ली में नानकपुरा के अलावा हर जिले में अलग से भी क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल है। दिल्ली लीगल सर्विस अथॉरिटी, राष्ट्रीय महिला आयोग, एनजीओ आदि की डेस्क क्राइम अगेंस्ट विमिन सेल में हैं। 

कैसे होती है कार्रवाई
महिला लोअर कोर्ट में शिकायत दर्ज कर सकती है। अगर वह घर से नहीं निकल सकती या दूसरी वजहें हैं तो वह कोर्ट द्वारा नियुक्त सर्विस प्रोवाइडर को फोन कर बुला सकती है। कोर्ट सुरक्षा अधिकारी भी नियुक्त करता है, जो महिला की सुरक्षा का जिम्मा संभालते हैं। शिकायत के बाद कोर्ट पुलिस को आदेश देता है। किसी भी तरह का उत्पीड़ऩ होने पर पुलिस को बुलाएं और एफआईआर की कॉपी अपने साथ रखें। इस कानून के तहत अदालत पीड़िता के बयान को सबसे ज्यादा अहमियत देती है। हालांकि अगर आपके पास किसी भी तरह के उत्पीडऩ़ के सबूत हैं, तो उन्हें संभाल कर रखें और कोर्ट में पेश करें। इस कानून के तहत केस दो महीने में सुलझ जाना चाहिए। अपराधी कोर्ट में 498 ए के तहत केस दर्ज नहीं किया जा रहा तो यह कोर्ट इस धारा के तहत केस दर्ज करने का आदेश दे सकता है।
 



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