चाणक्य नीति:राजा को दुर्बल समझकर न करें ऐसा कार्य, हो सकता है भयानक परिणाम

Monday, March 6, 2017 9:41 AM
चाणक्य नीति:राजा को दुर्बल समझकर न करें ऐसा कार्य, हो सकता है भयानक परिणाम

आचार्य चाणक्य का जन्म करीब 300 ईसा पूर्व में हुआ माना जाता है। महान राजनीतिज्ञ अौर कुटनीतिज्ञ होने के साथ-साथ इन्होंने मौर्य साम्राज्य की स्थापना व चन्द्रगुप्त मौर्य को सम्राट बनाने में अहम भूमिका निभाई थी। पाटलिपुत्र से संबंध होने के कारण उसे इन्होंने अपनी कर्मभूमि बनाया। आचार्य चाणक्य एक बड़े दूरदर्शी विद्वान थे। चाणक्य जैसे बुद्धिमान, रणनीतिज्ञ, चरित्रवान व राष्ट्रहित के प्रति समर्पित भाव वाले व्यक्ति भारत के इतिहास में ढूंढने से भी बहुत कम मिलते हैं। इनकी नीतियों में उत्तम जीवन का निर्वाह करने के बहुत से रहस्य समाहित हैं, जो आज भी उतने ही कारगर सिद्ध होते हैं। जितने कल थे। इन नीतियों को अपने जीवन में अपनाने से बहुत सी समस्याओं से बचा जा सकता है। चाणक्य के अनुसार राजा को दुर्बल समझकर उनका अपमान नहीं करना चाहिए। 

 

नास्त्यग्नेर्दौर्बल्यम्।

 

भावार्थ:जिस प्रकार आग की छोटी-सी चिंगारी विशाल वन को जला डालती है। उसी प्रकार एक छोटे से राजा का अपमान भी कभी-कभी भयानक युद्ध को न्यौता दे देता है इसलिए राजा को दुर्बल समझ कर उसका निरादर नहीं करना चाहिए।
 



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