Kundli Tv- कितना जानते हैं आप चार धाम के बारे में

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भारतीय ग्रंथों के अनुसार 10,000 फुट की ऊंचाई पर स्थित यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ हिन्दुओं के प्रमुख तीर्थ धाम हैं। इसे छोटी चार धाम यात्रा अथवा उत्तराखंड की यात्रा भी कहते हैं। चार धाम यात्रा में सबसे पहले यमुनोत्री, गंगोत्री उसके बाद केदारनाथ और अंत में बद्रीनाथ पहुंचने की परम्परा है।
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मंदिर की घंटियों, शंखों की गूंज और आरती के शब्दों से वातावरण में देवी-देवताओं के होने का एहसास होता है। इनके दर्शन साल के कुछ महीने ही हो पाते हैं क्योंकि ये मंदिर उच्च हिमालयी इलाके में बने हुए हैं। यहां सर्दी बहुत अधिक पड़ती है और बर्फ़बारी होने पर तो रास्ते भी बंद हो जाते हैं। भगवान के दर्शनों के लिए आए श्रद्धालुओं की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए चारों धामों के कपाट बंद कर दिए जाते हैं।

हर वर्ष अक्टूबर-नवंबर में कपाट 6 महीने के लिए बंद रहते हैं। जाड़े का मौसम खत्म होने के बाद जब गर्मी का मौसम शुरू होता है, अप्रैल-मई में फिर से भक्तों के लिए कपाट खोल दिए जाते हैं।
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यमुनोत्री समुद्र तल से 3195 मीटर की ऊंचाई पर स्थित है। यहां यमुना नदी का स्थान है। पास ही सूर्यपुत्री व शनि और यम की बहन यमुना जी का मंदिर स्थित है। यमुनोत्री में गर्मजल का सूर्यकुंड भी प्रसिद्ध है। मंदिर के कपाट प्रत्येक वर्ष अक्षय तृतीया के दिन खुलते हैं और दीपावली पश्चात गोवर्धन पूजा के दिन छह मास के लिए बंद हो जाते हैं।
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भागीरथी गंगा का स्थान है गंगोत्री धाम। यहां के कपाट भी अक्षय तृतीया को ही खुलते हैं। समुद्र तल से 3140 मीटर की ऊंचाई पर स्थित पावन तीर्थ स्थान पर गंगोत्री का मंदिर है। मान्यता है कि इसी स्थान पर महाभारत में मारे गए अपने परिजनों की आत्मिक शांति के लिए पांडवों ने महान देवयज्ञ अनुष्ठान सम्पन्न किया था। यमुनोत्री की तुलना में गंगोत्री की जनसंख्या अधिक है। गंगोत्री से लगभग 15 मील की दूरी पर गोमुख है।
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केदारनाथ धाम समुद्र तल से लगभग 3583 मीटर की ऊंचाई पर है। भारत के द्वादश ज्योतिर्लिंगों में इसकी गणना होती है। कहते हैं आदि शंकराचार्य ने अपनी मां के गहनों आदि से इस मंदिर का पुनरुद्धार, जीर्णोद्धार कराया था। वहीं उनके ही उत्तराधिकारी शृंखला के आचार्य धीरशंकर या अभिनव शंकर आठवीं शताब्दी के सुप्रसिद्ध अद्वैत दार्शनिक ने भी केदारनाथ मंदिर का पुनरुद्धार कराया था। यहां से वह व्यास गुफा गए और फिर संसार में न लौटे। उनकी स्मारक समाधि केदारनाथ मंदिर के पीछे बना दी गई। भगवान विष्णु बद्री विशाल का धाम बद्रीनाथ तीर्थ समुद्र तल से 3150 मीटर की ऊंचाई पर अलकनंदा नदी के बाएं तट पर नर और नारायण नामक दो पर्वत श्रेणियों के बीच स्थित है। मंदिर में नर-नारायण के विग्रहों की पूजा होती है और अखंड दीप जलता है। इस स्थान को अनादि सिद्ध कहा जाता है।
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