सड़क किनारे गर्भवती महिला ने बच्चे को ई-रिक्शा में दिया जन्म, बार-बार कॉल पर करने पर भी नहीं पहुंची एंबुलेंस
punjabkesari.in Monday, Mar 16, 2026 - 01:51 AM (IST)
नेशनल डेस्कः झारखंड के गोड्डा जिले में स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही का एक मामला सामने आया है। सदर अस्पताल ले जाते समय एक गर्भवती महिला ने रास्ते में ही ई-रिक्शा में बच्चे को जन्म दे दिया। यह घटना नोनमाटी गांव के पास हुई। परिजनों का आरोप है कि महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने के बाद कई बार फोन करने के बावजूद एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची। मजबूरी में परिवार को गर्भवती महिला को ई-रिक्शा से अस्पताल ले जाना पड़ा।
प्रसव पीड़ा शुरू होते ही मची अफरा-तफरी
मिली जानकारी के अनुसार बेलारी गांव के रहने वाले कौशल हरिजन की पत्नी रुक्मिणी देवी को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। इसके बाद परिवार के लोगों ने तुरंत सरकारी एंबुलेंस सेवा को फोन किया। परिजनों ने महिला को अस्पताल पहुंचाने के लिए 108 Ambulance Service और Mamta Vahan Yojana से संपर्क किया। उन्होंने बार-बार कॉल कर एंबुलेंस भेजने की गुहार लगाई। लेकिन परिजनों का कहना है कि काफी देर तक इंतजार करने और कई बार फोन करने के बावजूद कोई भी एंबुलेंस गांव तक नहीं पहुंची। इस बीच महिला की हालत लगातार बिगड़ती जा रही थी, जिससे परिवार के लोग बेहद परेशान और चिंतित हो गए।
मजबूरी में ई-रिक्शा से अस्पताल ले जाना पड़ा
गांव में उस समय कोई दूसरा वाहन उपलब्ध नहीं था। ऐसे में परिवार के लोगों ने मजबूरी में महिला को ई-रिक्शा से अस्पताल ले जाने का फैसला किया। इसके बाद परिजन महिला को ई-रिक्शा में बैठाकर सदर अस्पताल की ओर रवाना हुए।
रास्ते में ही ई-रिक्शा में हुआ प्रसव
अस्पताल जाते समय नोनमाटी गांव के पास महिला की प्रसव पीड़ा अचानक बहुत तेज हो गई। इसी दौरान महिला ने ई-रिक्शा में ही एक स्वस्थ बेटे को जन्म दे दिया। अचानक हुई इस घटना से आसपास मौजूद लोग भी हैरान रह गए। इसके बाद परिजनों और स्थानीय लोगों की मदद से मां और नवजात को किसी तरह सदर अस्पताल गोड्डा पहुंचाया गया।
अस्पताल में मां और बच्चे का इलाज शुरू
अस्पताल पहुंचने के बाद वहां मौजूद स्वास्थ्यकर्मियों ने तुरंत मां और नवजात को लेबर वार्ड में भर्ती किया और दोनों का इलाज शुरू कर दिया। फिलहाल डॉक्टरों की निगरानी में मां और बच्चा सुरक्षित बताए जा रहे हैं।
स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ परिजनों में नाराजगी
इस घटना के बाद परिवार के लोगों ने स्वास्थ्य विभाग के प्रति नाराजगी जताई है। उनका कहना है कि सरकार की ओर से कई स्वास्थ्य योजनाओं का प्रचार तो किया जाता है, लेकिन जरूरत पड़ने पर लोगों को समय पर सुविधाएं नहीं मिल पातीं। प्रसूता के पति कौशल हरिजन ने बताया कि उन्होंने कई बार एंबुलेंस के लिए फोन किया, लेकिन कोई भी वाहन गांव तक नहीं पहुंचा। उन्होंने कहा कि उनकी आर्थिक स्थिति कमजोर है और वे निजी वाहन की व्यवस्था भी नहीं कर सकते थे। इसी वजह से उन्हें मजबूर होकर अपनी पत्नी को ई-रिक्शा से अस्पताल ले जाना पड़ा।
