भारत-ब्रिटेन रिश्तों में नई उड़ानः पहली बार UK पहुंचे CDS अनिल, रक्षा सहयोग पर रहेगा फोकस

punjabkesari.in Monday, Apr 20, 2026 - 02:46 PM (IST)

London: भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा सहयोग को नई मजबूती देने के लिए जनरल अनिल चौहान (General Anil Chauhan) तीन दिवसीय आधिकारिक दौरे पर ब्रिटेन पहुंचे हैं। यह किसी भारतीय चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ का पहला आधिकारिक यूके दौरा है, इसलिए इसे ऐतिहासिक और रणनीतिक रूप से बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। इस दौरे की शुरुआत 19 अप्रैल से हुई है, जहां जनरल चौहान का स्वागत ब्रिटेन के रक्षा प्रमुख Richard Knighton करेंगे। इस दौरान दोनों देशों के बीच उच्चस्तरीय सैन्य और कूटनीतिक बैठकें होंगी, जिनमें रक्षा सहयोग को और गहरा करने पर चर्चा की जाएगी।

 

बातचीत का मुख्य फोकस तीन बड़े क्षेत्रों पर रहेगा सैन्य प्रशिक्षण, ऑपरेशनल सहयोग और रक्षा उद्योग में साझेदारी। दोनों देश संयुक्त सैन्य अभ्यासों को बढ़ाने, सेनाओं के बीच तालमेल (इंटरऑपरेबिलिटी) मजबूत करने और आधुनिक युद्ध तकनीकों के आदान-प्रदान पर जोर देंगे। इसके अलावा, रक्षा उत्पादन में “को-प्रोडक्शन” यानी संयुक्त रूप से हथियार और उपकरण बनाने की संभावनाओं पर भी चर्चा होगी, जिससे भारत के ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को मजबूती मिल सकती है। दौरे के दौरान जनरल चौहान Royal College of Defence Studies का भी दौरा करेंगे, जहां वे विभिन्न देशों के सैन्य अधिकारियों और छात्रों से बातचीत करेंगे।

 

यह मंच अंतरराष्ट्रीय सैन्य सहयोग और रणनीतिक सोच को समझने के लिए महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा, वे ब्रिटेन की रक्षा कंपनियों और उद्योग जगत के प्रतिनिधियों से भी मुलाकात करेंगे, ताकि नई तकनीक, इनोवेशन और रक्षा उत्पादन में साझेदारी को आगे बढ़ाया जा सके। यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब भारत और ब्रिटेन के बीच रक्षा संबंध तेजी से मजबूत हो रहे हैं। हाल ही में ब्रिटेन के एयर चीफ Harv Smyth भारत आए थे, जिससे दोनों देशों के बीच सैन्य संपर्क और सहयोग बढ़ा है। ब्रिटेन की उच्चायुक्त Lindy Cameron ने भी इस दौरे को दोनों देशों के बीच बढ़ते भरोसे और महत्वाकांक्षा का प्रतीक बताया है।

 

उन्होंने कहा कि भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक अहम रक्षा साझेदार है और दोनों देश मिलकर क्षेत्र में शांति, सुरक्षा और स्थिरता बनाए रखने के लिए काम कर रहे हैं। इस सहयोग का उद्देश्य सिर्फ सैन्य ताकत बढ़ाना ही नहीं, बल्कि नई तकनीकों के जरिए रक्षा क्षेत्र को आर्थिक विकास का इंजन बनाना भी है। कुल मिलाकर, जनरल अनिल चौहान का यह दौरा भारत-यूके रक्षा संबंधों के लिए एक बड़ा कदम माना जा रहा है। इससे दोनों देशों के बीच न सिर्फ सैन्य सहयोग बढ़ेगा, बल्कि रक्षा उत्पादन, तकनीक और वैश्विक रणनीति में भी नई संभावनाएं खुलेंगी।


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Content Writer

Tanuja

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