25 Hour Day: क्या आपकी घड़ी पीछे छूट जाएगी? अब 25 घंटे का होने जा रहा है एक दिन! जानें क्या सच में होगा ऐसा या नहीं?

punjabkesari.in Thursday, Jan 01, 2026 - 04:17 PM (IST)

नेशनल डेस्क आपने अक्सर यह कहते हुए लोगों को सुना होगा कि समय किसी के लिए रुकता नहीं, लेकिन ब्रह्मांड के विशाल मंच पर पृथ्वी की रफ्तार धीमी हो रही है। जिस 24 घंटे की घड़ी  पर पूरी दुनिया चलती है। असल में यह चंद्रमा के साथ पृथ्वी के एक 'गुरुत्वाकर्षण घर्षण' (Gravitational Friction) का परिणाम है। हाल ही में वैज्ञानिकों के ताजा शोध संकेत दे रहे हैं कि धरती की चाल धीरे-धीरे सुस्त पड़ रही है। इसका सीधा मतलब यह है कि आने वाले समय में हमारी घड़ी में एक दिन 24 घंटे का नहीं, बल्कि 25 घंटे का होगा।

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धरती की रफ्तार पर 'ब्रेक' क्यों?

पृथ्वी अपनी धुरी पर घूमती है, जिससे दिन और रात होते हैं। लेकिन यह रफ्तार पूरी तरह स्थिर नहीं है। वैज्ञानिक आंकड़ों के अनुसार हर सदी में धरती का रोटेशन कुछ मिलीसेकंड कम हो रहा है। इसके पीछे कई बड़े कारण हैं:

1.      चंद्रमा का खिंचाव: चंद्रमा का गुरुत्वाकर्षण पृथ्वी के समुद्रों में ज्वार-भाटा पैदा करता है। यह प्रक्रिया पृथ्वी के घूमने की गति पर एक 'ब्रेक' की तरह काम करती है, जिससे घूर्णन ऊर्जा कम हो रही है।

2.      पिघलती बर्फ और जलवायु परिवर्तन: नासा (NASA) के अनुसार ग्लेशियरों के पिघलने से पृथ्वी के द्रव्यमान का वितरण बदल रहा है। जब ध्रुवों की बर्फ पिघलकर भूमध्य रेखा की ओर बढ़ती है, तो धरती की रफ्तार धीमी हो जाती है।

3.      आंतरिक हलचल: पृथ्वी के कोर और मेंटल के भीतर होने वाली गतिविधियां और भूकंप भी इसकी गति को प्रभावित करते हैं।

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कब और कैसे बदलेगा वक्त?

यह बदलाव इतना धीमा है कि हम इसे अपनी जिंदगी में महसूस नहीं कर सकते। वैज्ञानिकों का अनुमान है कि एक दिन को 25 घंटे का होने में लगभग 20 करोड़ साल का समय लग सकता है। परमाणु घड़ियों (Atomic Clocks) की मदद से वैज्ञानिक इस सूक्ष्म बदलाव को सटीकता से माप रहे हैं।

सौर दिवस और नक्षत्र दिवस का कैलकुलेशन

हम जिस 24 घंटे को एक दिन मानते हैं, वह 'सौर दिवस' है। लेकिन पृथ्वी तारों के तुलना में अपना चक्कर 23 घंटे 56 मिनट में ही पूरा कर लेती है, जिसे 'नक्षत्र दिवस' कहते हैं। इन्हीं बारीकियों में छिपे बदलाव भविष्य के 25 घंटों का आधार बन रहे हैं।

 


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News Editor

Radhika

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