महाराज जी! मेरे पति की कामेच्छा बहुत अधिक है... ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए? प्रेमानंद का जवाब इंटरनेट पर तेजी से Viral
punjabkesari.in Thursday, Feb 12, 2026 - 03:09 PM (IST)
Premanand Maharaj Viral Video : सोशल मीडिया पर अपने बेबाक और सटीक जवाबों के लिए मशहूर प्रेमानंद महाराज के पास रोज हजारों भक्त अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। हाल ही में एक महिला भक्त ने महाराज के सामने अपनी एक ऐसी निजी और गंभीर समस्या रखी जो आज के समय में कई शादीशुदा जोड़ों के बीच विवाद का कारण बनती है। महिला की पीड़ा और उस पर महाराज का व्यावहारिक जवाब अब इंटरनेट पर तेजी से वायरल हो रहा है।
क्या थी महिला की समस्या?
वृंदावन के श्री हित राधा केली कुंज आश्रम पहुंची इस महिला ने बताया कि वह अब अध्यात्म और भक्ति के मार्ग पर चलना चाहती है जिसके कारण उसके भीतर से शारीरिक इच्छाएं पूरी तरह खत्म हो गई हैं। महिला ने दुखी होकर कहा, "मेरे पति की कामेच्छा बहुत अधिक है। उनकी इस मांग को पूरा करते-करते मैं मानसिक और शारीरिक रूप से थक जाती हूं। मैं भक्ति करना चाहती हूं ऐसी स्थिति में मुझे क्या करना चाहिए?"
महाराज का समाधान: पति का साथ देना पत्नी का धर्म
महिला की बात सुनकर प्रेमानंद महाराज ने बहुत ही धैर्य और सहजता से उसे गृहस्थ धर्म का पाठ पढ़ाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि केवल माला जपना ही धर्म नहीं है बल्कि अपने कर्तव्यों को निभाना भी ईश्वर की सेवा है।
महाराज की प्रमुख सलाह:
तालमेल है जरूरी: महाराज ने कहा कि गृहस्थ जीवन में पति-पत्नी को एक-दूसरे के पूरक के रूप में चलना चाहिए। अगर पत्नी वैराग्य की ओर है और पति अभी उस अवस्था में नहीं पहुंचा है, तो पत्नी को जबरदस्ती अपनी इच्छाएं उस पर नहीं थोपनी चाहिए।
गलत रास्ते पर न जाए जीवनसाथी: गुरुजी ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि पत्नी पति की उपेक्षा करती है, तो इस बात की पूरी आशंका है कि पति अपनी इच्छा पूर्ति के लिए किसी गलत रास्ते या अवैध संबंधों की ओर मुड़ जाए। पति को पतन से बचाना और उसे मर्यादित रखना भी पत्नी का धर्म है।
प्यार से समझाएं: महाराज ने सलाह दी कि पति को एक दोस्त की तरह प्यार से समझाएं और धीरे-धीरे उन्हें भी अध्यात्म के मार्ग से जोड़ने की कोशिश करें।
संयम और सहयोग ही सुखद गृहस्थी का आधार
प्रेमानंद महाराज ने जोर देकर कहा कि शादी का अर्थ ही दो लोगों का आपसी सहयोग है। उन्होंने महिला से कहा कि वह अपनी साधना भी जारी रखे लेकिन पति के प्रति अपने गृहस्थ उत्तरदायित्वों से मुंह न मोड़े। रिश्तों में संतुलन बनाकर ही शांति और भक्ति दोनों पाई जा सकती हैं।
