WHO Alert: हर 10 में से 1 भारतीय को कैंसर का खतरा, डॉक्टरों ने बताए बड़े कारण... ये लक्षण दिखें तो तुरंत डॉक्टर के पास जाएं
punjabkesari.in Monday, Jul 13, 2026 - 02:24 PM (IST)
India Cancer Risk: भारत में कैंसर के मामलों में एक चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के एक अनुमान के अनुसार, देश में लगभग हर 10 में से 1 व्यक्ति को 75 वर्ष की उम्र से पहले कैंसर होने का खतरा हो सकता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि बदलता लाइफस्टाइल, तंबाकू का बढ़ता उपयोग, प्रदूषण, कुछ पुराने संक्रमण और समय पर बीमारी की पहचान न हो पाना इस बढ़ते खतरे की बड़ी वजह हैं।
डबल चैलेंज का सामना कर रहा भारत
कैंसर विशेषज्ञों के अनुसार, भारत में अब केवल तंबाकू से होने वाले कैंसर ही नहीं, बल्कि आधुनिक जीवनशैली से जुड़े कैंसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं। डॉक्टरों का कहना है कि जहां कई विकसित देशों में मोटापा कैंसर का प्रमुख कारण बन रहा है, वहीं भारत में तंबाकू से होने वाले कैंसर के साथ-साथ मोटापा, खराब खानपान और Physical inactivity से जुड़े कैंसर भी तेजी से बढ़ रहे हैं।
तंबाकू अब भी सबसे बड़ा खतरा
विशेषज्ञों का मानना है कि तंबाकू आज भी कैंसर का सबसे बड़ा रोके जा सकने वाला कारण है। सिगरेट, बीड़ी, गुटखा, खैनी, पान मसाला और सुपारी का सेवन विशेष रूप से मुंह के कैंसर का खतरा बढ़ाता है। भारत में ओरल कैंसर सबसे आम कैंसरों में शामिल है।
बदलती लाइफस्टाइल भी बढ़ा रही खतरा
डॉक्टरों के अनुसार, आजकल ब्रेस्ट कैंसर, कोलोरेक्टल कैंसर और प्रोस्टेट कैंसर के मामलों में भी लगातार वृद्धि देखी जा रही है। इसके पीछे कई कारण बताए जा रहे हैं, जैसे....
-मोटापा
-शारीरिक गतिविधि की कमी
-असंतुलित भोजन
-फास्ट फूड का अधिक सेवन
-देर से शादी या गर्भधारण
-हार्मोनल बदलाव
-लंबे समय तक तनाव
-शराब और प्रदूषण भी बन रहे जोखिम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि अत्यधिक शराब का सेवन और लंबे समय तक प्रदूषित वातावरण में रहना भी कैंसर के खतरे को बढ़ा सकता है। इसके अलावा वैज्ञानिक अब भोजन में मौजूद हानिकारक तत्वों पर भी स्टडी कर रहे हैं। इनमें शामिल हैं---
-फलों और सब्जियों पर कीटनाशकों के अवशेष
-खाने में मिलावट
-अनाज और दालों में प्रदूषक तत्व
-पशु उत्पादों में एंटीबायोटिक या हार्मोन के अवशेष
हालांकि इन विषयों पर अभी रिसर्च जारी है, लेकिन विशेषज्ञ इन्हें संभावित जोखिम मान रहे हैं।
माइक्रोबायोम पर भी हो रही रिसर्च
वैज्ञानिक शरीर में मौजूद अच्छे और बुरे सूक्ष्म जीवों यानी माइक्रोबायोम की भूमिका का भी स्टडी कर रहे हैं। माना जा रहा है कि माइक्रोबायोम में बदलाव कुछ लोगों में कम उम्र में कैंसर होने की संभावना बढ़ा सकता है। हालांकि इस विषय पर अभी और शोध की जरूरत है।
कुछ संक्रमण भी बढ़ाते हैं कैंसर का खतरा
भारत में कई प्रकार के कैंसर पुराने संक्रमणों से जुड़े पाए गए हैं। जैसे कि...
HPV (Human Papillomavirus): सर्वाइकल कैंसर का प्रमुख कारण।
Hepatitis B और Hepatitis C: लिवर कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं।
Helicobacter pylori: पेट के कैंसर से जुड़ा बैक्टीरिया।
देर से जांच क्यों बनती है बड़ी समस्या
विशेषज्ञों के अनुसार, कई लोग शुरुआती लक्षणों को नजरअंदाज कर देते हैं। जागरूकता की कमी, जांच का डर, सामाजिक झिझक और नियमित स्क्रीनिंग न कराने के कारण कैंसर का पता अक्सर तब चलता है जब बीमारी काफी आगे बढ़ चुकी होती है। ऐसी स्थिति में इलाज कठिन हो जाता है और ठीक होने की संभावना भी कम हो जाती है। वहीं यदि बीमारी शुरुआती चरण में पकड़ में आ जाए तो इलाज अधिक सफल होता है और मरीज के स्वस्थ होने की संभावना काफी बढ़ जाती है।
कैंसर से बचने के लिए अपनाएं ये आदतें
विशेषज्ञों का कहना है कि हर कैंसर को रोका नहीं जा सकता, लेकिन कई मामलों में जोखिम काफी हद तक कम किया जा सकता है।
-किसी भी प्रकार का तंबाकू बिल्कुल न लें।
-शराब का सेवन सीमित रखें या पूरी तरह छोड़ दें।
-रोजाना कम से कम 30-45 मिनट व्यायाम करें।
-स्वस्थ वजन बनाए रखें।
-भोजन में फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और फाइबर शामिल करें।
-अधिक तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड कम खाएं।
-डॉक्टर की सलाह के अनुसार HPV और Hepatitis B का टीका लगवाएं।
उम्र के अनुसार ब्रेस्ट, सर्वाइकल, कोलोरेक्टल और मुंह के कैंसर की नियमित स्क्रीनिंग कराएं।
-यदि परिवार में कैंसर का इतिहास है तो नियमित स्वास्थ्य जांच अवश्य कराएं।
इन लक्षणों को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
-बिना वजह वजन कम होना
-शरीर में गांठ महसूस होना
-लगातार मुंह का घाव या छाला
-असामान्य रक्तस्राव
-लंबे समय तक खांसी
-मल या पेशाब की आदतों में बदलाव
-लगातार कमजोरी या थकान
-20 वर्ष की उम्र के बाद नियमित हेल्थ चेकअप जरूरी
स्वास्थ्य विशेषज्ञ की सलाह के अनुसार, 20 साल की उम्र के बाद हर साल सामान्य स्वास्थ्य जांच करानी चाहिए। यदि परिवार में कैंसर का इतिहास है या अन्य जोखिम मौजूद हैं, तो डॉक्टर की सलाह के अनुसार समय-समय पर विशेष जांच भी करानी चाहिए।
