''छात्रों को मारने का आदेश किसने दिया?'' पुलिस कार्रवाई पर राहुल ने शाह को लिखा पत्र, मांगा जवाब
punjabkesari.in Sunday, Jul 26, 2026 - 12:29 PM (IST)
नेशनल डेस्क: कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष एवं लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने गृह मंत्री अमित शाह को पत्र लिखकर 20 जुलाई को जंतर मंतर छात्रों के प्रदर्शन के दौरान हुई पुलिस कारर्वाई पर जवाबदेही तय करने, पैलेट गन के इस्तेमाल करने की जांच कराने और संबंधित अधिकारियों के खिलाफ कारर्वाई की मांग की है। गांधी ने शनिवार को लिखे इस पत्र को सार्वजनिक करते हुए रविवार को कहा कि छात्र निष्पक्ष और जवाबदेह शिक्षा व्यवस्था की मांग को लेकर शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे थे, लेकिन उनकी बात सुनने के बजाय सुरक्षा बलों ने उन पर अंधाधुंध बल प्रयोग किया।
उन्होंने आरोप लगाया कि इस कार्रवाई में पैलेट गन, आंसू गैस और अन्य घातक साधनों का इस्तेमाल किया गया, जिससे सैकड़ों छात्र गंभीर रूप से घायल हुए। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि महिला छात्राओं के साथ भी पुलिसकर्मियों द्वारा दुर्व्यवहार किया गया और जानबूझकर उनको निजी स्तर पर निशाना बनाया गया। उन्होंने कहा कि सबसे गंभीर आरोप पैलेट गन के इस्तेमाल का है। मीडिया और सोशल मीडिया में सामने आई रिपोटरं के अनुसार कई लोग, जिनमें एक पत्रकार भी शामिल है, पैलेट गन के इस्तेमाल से गंभीर रूप से घायल हुए हैं।
उन्होंने 19 वर्षीय साहिल लोचाब से मुलाकात की, जो गंभीर पीड़ा में है और पैलेट गन लगने के कारण उसकी एक आंख की रोशनी जाने की आशंका है। गांधी ने कहा कि दिल्ली में तैनात सुरक्षा बल अंतत: गृह मंत्री के प्रति जवाबदेह हैं। उन्होंने शाह से पूछा कि क्या गृह मंत्री के रूप में उन्होंने छात्रों के खिलाफ पैलेट गन सहित घातक बल के इस्तेमाल की अनुमति दी थी। यदि नहीं, तो इसकी अनुमति किसने दी। उन्होंने यह भी पूछा कि सादे कपड़ों में लाठी लेकर छात्रों को पीटते दिखाई देने वाले लोग पुलिसकर्मी थे या स्वयंसेवक तथा उनकी तैनाती किसके आदेश पर की गई।
गांधी ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन लोकतंत्र के लिए आवश्यक है। सरकार की जिम्मेदारी है कि वह प्रदर्शनकारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करे और उनकी शिकायतों का समाधान संवाद के माध्यम से करे। छात्रों पर हुई बर्बर हिंसा ने लोकतांत्र की मर्यादाओं को तार-तार कर दिया है और पूरे देश को आक्रोशित किया है। उन्होंने कहा कि युवा और छात्र देश का भविष्य हैं तथा वे जवाब और जवाबदेही की मांग कर रहे हैं। उनकी आवाज को दबाया नहीं जा सकता और उसे हर हाल में सुना जाना चाहिए।
