खरगे और राहुल गांधी ने PM मोदी को लिखा पत्र, राम मंदिर मामले में स्वतंत्र और व्यापक जांच की मांग की

punjabkesari.in Sunday, Jul 19, 2026 - 02:58 PM (IST)

नेशनल डेस्कः राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे एवं लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को पत्र लिखकर आग्रह किया है कि श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में कथित वित्तीय अनियमितताओं और राम मंदिर से चढ़ावे की कथित चोरी के आरोपों की तत्काल स्वतंत्र एवं व्यापक जांच कराई जाए। कांग्रेस के दोनों शीर्ष नेताओं ने प्रधानमंत्री से ट्रस्ट के वित्तीय मामलों, श्रद्धालुओं से प्राप्त नकदी, सोने और चांदी समेत सभी चढ़ावों के प्रबंधन की जांच कराने तथा जांच के निष्कर्ष और ट्रस्ट के खातों को सार्वजनिक करने का भी आग्रह किया।

कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने पत्र साझा करते हुए 'एक्स' पर पोस्ट किया, ''प्रधानमंत्री जी, राम मंदिर में करोड़ों श्रद्धालुओं ने आस्था के साथ अपनी कमाई अर्पित की - वहां हुई चंदा चोरी अब किसी से छुपी नहीं है। ट्रस्ट के हर सदस्य को आपकी सरकार ने चुना था। इस चंदा चोरी पर आपकी चुप्पी अस्वीकार्य है।'' उन्होंने कहा, ''तत्काल स्वतंत्र जांच कराइए, पूरा हिसाब सार्वजनिक कीजिए और दोषियों को कानून के कटघरे में लाइए।

आपकी सरकार की विश्वसनीयता अब आपकी कार्रवाई पर निर्भर है।'' कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने इस पत्र का हवाला देते कहा कि अब प्रधानमंत्री को इस मामले पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए। उन्होंने कहा, ''यह उचित ही है कि दोनों सदनों के नेता प्रतिपक्ष ने अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट से जुड़े चंदा चोरी, आस्था धोखा मामले पर प्रधानमंत्री को पत्र लिखा है। पांच फरवरी, 2020 को लोकसभा में अपनी दुर्लभ उपस्थितियों में से एक के दौरान प्रधानमंत्री ने इस ट्रस्ट की स्थापना की घोषणा करते हुए इसका पूरा श्रेय स्वयं लिया था।''

रमेश का कहना है, ''यही ट्रस्ट आज देशभर के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था और विश्वास के साथ विश्वासघात कर चुका है। प्रधानमंत्री जी, चुप्पी तोड़िये।'' यह पत्र 18 जुलाई को लिखा गया और इसमें कहा गया, ''लाखों श्रद्धालुओं ने आस्था और विश्वास के साथ अपनी मेहनत की कमाई मंदिर के लिए दान की है और कथित चोरी के आरोपों से वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।"

खरगे और राहुल गांधी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने उच्चतम न्यायालय के निर्देश के बाद संसद में ट्रस्ट के गठन की घोषणा की थी, लेकिन इसके सदस्यों की नियुक्ति सरकार द्वारा की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि ट्रस्ट के कई सदस्य राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस), विश्व हिंदू परिषद (विहिप) और उनसे जुड़े संगठनों से संबद्ध रहे हैं। दोनों नेताओं ने कहा कि प्रधानमंत्री की चुप्पी स्वीकार्य नहीं है और जवाबदेही सुनिश्चित करना तथा श्रद्धालुओं के विश्वास की रक्षा करना उनकी जिम्मेदारी है।

पत्र में कहा गया है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले सभी लोगों के खिलाफ, उनके पद या प्रभाव की परवाह किए बिना, कार्रवाई की जानी चाहिए। पत्र में कहा गया, ''सरकार और ट्रस्ट की विश्वसनीयता इस बात पर निर्भर करती है कि आप कितनी पारदर्शिता और तत्परता से कार्रवाई करते हैं। देश की जनता देख रही है।''


 


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Content Editor

Sahil Kumar

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