पश्चिम बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा आदेश: 10वीं का एडमिट कार्ड अब पूरक दस्तावेज, सत्यापन के लिए अतिरिक्त जज तैनात
punjabkesari.in Wednesday, Feb 25, 2026 - 08:30 PM (IST)
नेशनल डेस्क:सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) प्रक्रिया को लेकर अहम दिशा-निर्देश जारी किए हैं। कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि मतदाता सूची के सत्यापन के दौरान 10वीं (माध्यमिक) का एडमिट कार्ड, पास सर्टिफिकेट के साथ प्रस्तुत किए जाने पर सहायक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जा सकता है।
यह आदेश मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमल्य बागची और जस्टिस विपुल एम. पंचोली की पीठ ने 25 फरवरी 2026 को दिया। सुनवाई के दौरान वरिष्ठ अधिवक्ता डीएस नायडू ने इस मुद्दे का उल्लेख किया था।
एडमिट कार्ड पर कोर्ट की स्पष्टता
शीर्ष अदालत ने दोहराया कि 10वीं का एडमिट कार्ड अपने आप में पूर्ण पहचान प्रमाण नहीं माना जाएगा। इसे केवल जन्मतिथि और माता-पिता की पहचान की पुष्टि के लिए पास सर्टिफिकेट के साथ पूरक दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाएगा।
24 फरवरी 2026 के आदेश के अनुसार, 15 फरवरी 2026 से पहले प्राप्त लेकिन अब तक अपलोड न किए गए सभी दस्तावेजों को इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसर (ERO) और सहायक ERO द्वारा 26 फरवरी 2026 शाम 5 बजे तक संबंधित पीठासीन न्यायिक अधिकारियों को सौंपना होगा।
80 लाख आपत्तियों के निपटारे के लिए अतिरिक्त न्यायिक व्यवस्था
SIR प्रक्रिया के तहत लगभग 80 लाख ‘लॉजिकल डिस्क्रेपेंसी’ और आपत्तियों के समाधान के लिए अदालत ने विशेष व्यवस्था की अनुमति दी है। कलकत्ता हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को कम से कम तीन वर्ष के अनुभव वाले अतिरिक्त सिविल जजों की नियुक्ति करने की छूट दी गई है। आवश्यकता पड़ने पर झारखंड और ओडिशा से सेवारत या सेवानिवृत्त न्यायिक अधिकारियों की सेवाएं भी ली जा सकती हैं। इन अधिकारियों का खर्च चुनाव आयोग वहन करेगा।
28 फरवरी तक अंतिम वोटर लिस्ट संभव
अदालत ने कहा है कि 28 फरवरी 2026 तक अंतिम मतदाता सूची प्रकाशित की जा सकती है। यदि किसी कारण से सत्यापन प्रक्रिया पूरी नहीं हो पाती है, तो पूरक सूचियां लगातार जारी की जाएंगी और उन्हें अंतिम सूची का ही हिस्सा माना जाएगा। यह व्यवस्था संविधान के आर्टिकल 142 के तहत लागू होगी।
सियासी घमासान तेज
SIR प्रक्रिया को लेकर राज्य में राजनीतिक माहौल गरमा गया है। कोलकाता स्थित CEO कार्यालय के बाहर सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (TMC) और भारतीय जनता पार्टी (BJP) समर्थकों के बीच तीखी नोकझोंक और झड़प की खबरें सामने आईं। विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी के विरोध में प्रदर्शन किया गया। दोनों दलों ने एक-दूसरे पर आरोप लगाए, जिसके बाद पुलिस ने हस्तक्षेप कर स्थिति को नियंत्रित किया।
क्या है पूरा विवाद?
मतदाता सूची में नाम हटने की आशंका को लेकर राजनीतिक दल आमने-सामने हैं। आरोप-प्रत्यारोप के बीच सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में SIR प्रक्रिया आगे बढ़ रही है, जिससे पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की कोशिश की जा रही है।
